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आपदा राहत बजट: योगी सरकार ने 710 करोड़ जारी किए, 1242 रैन बसेरों में 64 हजार लोगों को मिला सहारा

On: January 31, 2026
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आपदा राहत बजट: योगी सरकार ने 710 करोड़ जारी किए
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लखनऊ | 31 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश में इस सर्दी और आपदा के मौसम के बीच एक बड़ी प्रशासनिक तैयारी quietly काम करती दिखी। आपदा राहत बजट के तहत राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 710.12 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह धनराशि बाढ़, शीतलहर, अग्निकांड, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान और अन्य प्राकृतिक व मानवजनित आपदाओं से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के लिए जारी की गई। इस पहल की निगरानी योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राहत आयुक्त कार्यालय कर रहा है, जिसने ज़मीनी स्तर पर कई ठोस व्यवस्थाएं खड़ी की हैं।

आपदा राहत बजट से त्वरित राहत और पुनर्वास को मिली रफ्तार

आपदा राहत बजट का सबसे बड़ा हिस्सा, 365.73 करोड़ रुपये, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और पुनर्वास पर खर्च किया गया। सरयू, गंगा और घाघरा के किनारे बसे जिलों में इस राशि से राहत सामग्री, अस्थायी शरण, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्य तेज किए गए।

इसके अलावा—

  • चक्रवात व आंधी-तूफान से क्षति पर: 14.13 करोड़ रुपये
  • ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई: 0.13 करोड़ रुपये
  • अग्निकांड पीड़ितों के लिए: 14.63 करोड़ रुपये
  • शीतलहर से बचाव: 50.72 करोड़ रुपये
  • अन्य आपदाओं हेतु: 246.63 करोड़ रुपये
  • सामान्य मद: 0.44 करोड़ रुपये
  • अन्य राहत कार्य: 17.71 करोड़ रुपये

इन मदों में खर्च का उद्देश्य केवल मुआवजा देना नहीं, बल्कि राहत तंत्र को पहले से अधिक सक्रिय और समन्वित बनाना रहा।

5.89 लाख कंबल, 27 हजार अलाव और 1242 रैन बसेरे

सर्दी के मौसम में राहत आयुक्त कार्यालय की तैयारी विशेष रूप से नजर आई। निराश्रितों और जरूरतमंदों के लिए:

  • कंबल वितरण हेतु: 45.51 करोड़ रुपये
  • अलाव जलाने के लिए: 3.51 करोड़ रुपये

प्रदेश के 27,027 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई, जहां अब तक 1,69,834 अलाव जलाए जा चुके हैं। इसके साथ ही 5,89,689 कंबल वितरित किए गए।

सबसे अहम पहल रही 1,242 रैन बसेरों की स्थापना, जहां अब तक 64,000 से अधिक लोगों ने शरण ली। शीतलहर के दौरान यह व्यवस्था जीवन-रक्षा का वास्तविक सहारा बनी।

आपदा प्रबंधन में उभरता मॉडल राज्य

उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन अब केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास के समन्वित मॉडल की ओर बढ़ा है। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा ‘आपदा प्रहरी’ ऐप और 1070 टोल-फ्री नंबर का संचालन भी किया जा रहा है, जिससे प्रभावित लोग तुरंत मदद तक पहुंच सकें।

प्रशासन का फोकस साफ है—आपदा के समय राहत केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखनी चाहिए।

निष्कर्ष

आपदा राहत बजट का यह उपयोग बताता है कि राहत और पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार ने बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। आंकड़े सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि उस राहत का संकेत हैं जो हजारों परिवारों तक समय पर पहुंची। सर्द रातों में जलते अलाव, बंटते कंबल और खुले रैन बसेरे इस बात की गवाही देते हैं कि आपदा के समय प्रशासन की तैयारी किस तरह जीवन बचाने का काम करती है।

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