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आकाशवाणी स्थापना दिवस: सीएम योगी बोले— भाषा की शुद्धता सीखनी हो तो आकाशवाणी सुनें

On: April 2, 2026
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आकाशवाणी स्थापना दिवस- सीएम योगी बोले
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लखनऊ, 02 अप्रैल 2026। तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया के बीच जब सूचना के स्रोत लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में आकाशवाणी स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस दौर को याद किया, जब एक रेडियो ही पूरे समाज को जोड़ने का सबसे भरोसेमंद माध्यम हुआ करता था।

गुरुवार को आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होते हुए सीएम योगी ने अपने बचपन की यादों को साझा किया—और यह भी बताया कि भाषा की शुद्धता सीखने के लिए आकाशवाणी आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

आकाशवाणी स्थापना दिवस पर यादों और अनुभवों की झलक

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम का माहौल सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि उसमें एक भावनात्मक जुड़ाव भी साफ नजर आया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय ऐसा था जब न स्मार्टफोन थे, न टेलीविजन की भरमार—और लैंडलाइन फोन भी गिने-चुने घरों तक सीमित थे। उस दौर में सुबह की शुरुआत आकाशवाणी की धुन से होती थी।

उन्होंने मुस्कुराते हुए याद किया कि “भरत चले चित्रकूट” जैसी धुनें सिर्फ संगीत नहीं थीं, बल्कि दिन की शुरुआत का हिस्सा थीं—एक आदत, जो धीरे-धीरे संस्कृति बन गई।

“भाषा की शुद्धता सीखनी हो तो आकाशवाणी सुनें”

अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी का यह वाक्य सबसे ज्यादा चर्चा में रहा कि—
“अगर भाषा को शुद्ध करना हो, तो आकाशवाणी सुनें।”

उन्होंने बताया कि आकाशवाणी के उद्घोषकों की भाषा, शब्दों का चयन और उच्चारण इतना सटीक होता था कि लोग अनायास ही सही हिंदी सीख जाते थे।

उनके अनुसार, उस दौर की पत्रकारिता में न तो अतिरंजन (sensationalism) था और न ही तथ्यों से छेड़छाड़—जो था, वह सटीक और संतुलित प्रस्तुति थी।

बोलियों और लोककलाओं को मिला मंच

सीएम योगी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आकाशवाणी ने केवल समाचार देने का काम नहीं किया, बल्कि देश की विविध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित किया।

उन्होंने कहा कि हिंदी की उपभाषाओं के साथ-साथ भोजपुरी, अवधी, गढ़वाली और कुमाऊंनी जैसी बोलियों को आकाशवाणी ने एक मंच दिया।

यह मंच उन लोगों तक भी पहुंचा, जो दूरदराज के इलाकों में रहते थे—जहां सड़कें तक नहीं थीं, वहां भी रेडियो की आवाज पहुंचती थी।

आजादी के आंदोलन से लेकर ‘मन की बात’ तक

आकाशवाणी के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मंच देश की आजादी की लड़ाई का भी साक्षी रहा है।

उन्होंने Quit India Movement, विभाजन की त्रासदी और स्वतंत्रता के बाद के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि आकाशवाणी ने हर महत्वपूर्ण मोड़ पर देश के साथ कदम मिलाकर चलने का काम किया।

वहीं, आज के संदर्भ में उन्होंने Mann Ki Baat का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश के सकारात्मक प्रयासों और प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाता है।

जनविश्वास का प्रतीक बना आकाशवाणी

सीएम योगी ने कहा कि आकाशवाणी सिर्फ एक प्रसारण सेवा नहीं, बल्कि जनविश्वास (public trust) का प्रतीक बन चुका है।

उन्होंने बताया कि पहले के दौर में किसान ‘किसान दर्शन’ जैसे कार्यक्रमों से खेती की जानकारी लेते थे, वहीं कलाकार और लोकवाद्य वादक भी इसी मंच के जरिए देशभर में पहचान बनाते थे।

उनके शब्दों में, “जिस जगह कोई नहीं पहुंच पाता था, वहां आकाशवाणी पहुंचता था”—और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत थी।

भविष्य के लिए नए दृष्टिकोण की जरूरत

हालांकि मुख्यमंत्री ने अतीत की उपलब्धियों को सराहा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बदलते समय के साथ आकाशवाणी को खुद को नए सांचे में ढालना होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि आज के युवाओं, साहित्यकारों, कलाकारों और किसानों को जोड़ने के लिए कार्यक्रमों में नवाचार लाना जरूरी है।

सीएम ने विश्वास जताया कि नए दृष्टिकोण और तकनीक के साथ आकाशवाणी आने वाले समय में भी समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम करता रहेगा।

ऐतिहासिक विरासत को किया नमन

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने Govind Ballabh Pant को भी याद किया, जिन्होंने 2 अप्रैल 1938 को आकाशवाणी लखनऊ केंद्र का शुभारंभ किया था।

कार्यक्रम में पद्म पुरस्कार से सम्मानित विभूतियों और आकाशवाणी से जुड़े वरिष्ठ प्रसारकों को सम्मानित किया गया।

मंच पर प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी, महानिदेशक राजीव कुमार जैन, कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

निष्कर्ष: बदलते दौर में भी कायम है भरोसा

आज भले ही सूचना के अनगिनत माध्यम उपलब्ध हों, लेकिन आकाशवाणी स्थापना दिवस पर सीएम योगी के शब्द यह याद दिलाते हैं कि भरोसे और गुणवत्ता की अपनी अलग ही पहचान होती है।

आकाशवाणी ने पीढ़ियों को जोड़ा है—और अगर यह बदलते समय के साथ खुद को ढालता रहा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह उतना ही प्रासंगिक बना रहेगा।

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