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अब तारीख पर तारीख नहीं… FIR से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में न्याय का लक्ष्य, अमित शाह ने बताई नई व्यवस्था

On: October 3, 2026
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FIR से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में न्याय का लक्ष्य, अमित शाह ने बताई नई व्यवस्था
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भोपाल/3 अक्टूबर 2026: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को भोपाल में नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में लंबे समय से मामलों के निपटारे में देरी एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद FIR दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की प्रक्रिया तीन साल के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

अमित शाह ने यह बात भोपाल के BHEL दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद कही। प्रदर्शनी में अपराध की सूचना मिलने से लेकर पुलिस जांच, साक्ष्य जुटाने, गिरफ्तारी, अभियोजन और अदालत के फैसले तक की पूरी प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया है। इसमें डिजिटल तकनीक और फॉरेंसिक जांच के इस्तेमाल को भी प्रमुखता से दिखाया गया है।

FIR से सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में न्याय का लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था कभी मामलों में देरी और लगातार पड़ने वाली तारीखों के लिए चर्चा में रहती थी। उनके मुताबिक, नए आपराधिक कानूनों और उनसे जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद FIR से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामले की प्रक्रिया को तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तीन साल में न्याय का उल्लेख अमित शाह ने सरकार के लक्ष्य के रूप में किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक आपराधिक मुकदमे का फैसला स्वतः तीन साल में होना कानूनी रूप से सुनिश्चित हो गया है।

नई व्यवस्था में समयबद्ध जांच, डिजिटल प्रक्रियाओं, फॉरेंसिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है। भोपाल में लगाई गई प्रदर्शनी में भी आपराधिक मामले की पूरी यात्रा को इसी क्रम में समझाया गया है।

नए आपराधिक कानूनों से बदली आपराधिक न्याय व्यवस्था

देश में तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) शामिल हैं।

इन कानूनों का उद्देश्य पुराने आपराधिक कानूनों की जगह नई कानूनी व्यवस्था लागू करना है। नई व्यवस्था में तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच की भूमिका को भी अधिक महत्व दिया गया है।

भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी में इन बदलावों को आम लोगों के लिए सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया गया। प्रदर्शनी में नए कानूनों के तहत समयबद्ध प्रावधानों, पुलिस, फॉरेंसिक साइंस लैब, अभियोजन और जेल प्रशासन की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया है।

145 समयबद्ध प्रावधानों पर भी फोकस

नए आपराधिक कानूनों पर लगाई गई प्रदर्शनी में 145 समयबद्ध प्रावधानों को भी प्रदर्शित किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि अपराध की सूचना मिलने के बाद पुलिस जांच से लेकर अदालत में न्यायिक प्रक्रिया तक अलग-अलग चरण किस तरह आगे बढ़ेंगे।

डिजिटल स्क्रीन, पोस्टर, मॉडल और वीडियो के माध्यम से प्रक्रिया को समझाया गया है। खास बात यह है कि फॉरेंसिक जांच और डिजिटल तकनीक को भी नई आपराधिक न्याय प्रणाली के अहम हिस्से के तौर पर सामने रखा गया है।

31 दिसंबर 2029 तक नशे के खिलाफ लक्ष्य

भोपाल में अमित शाह ने नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की मुहिम का भी उल्लेख किया। उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से मुक्त करने के लक्ष्य की बात कही।

नशीले पदार्थों के खिलाफ केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 से 2029 के लिए एक अलग विजन दस्तावेज भी तैयार किया है। केंद्र के अनुसार, 31 दिसंबर 2029 तक देश से नशीले पदार्थों के कारोबार को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

भोपाल में नए आपराधिक कानूनों पर पांच दिवसीय प्रदर्शनी

BHEL दशहरा मैदान में आयोजित नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी पांच दिन चलेगी। इसमें अपराध की सूचना मिलने से लेकर जांच, साक्ष्य संग्रह, गिरफ्तारी, अभियोजन और अदालत के फैसले तक की प्रक्रिया को लोगों के सामने रखा गया है।

अमित शाह के भोपाल दौरे में नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी के साथ राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन भी शामिल रहा। सम्मेलन में बड़ी संख्या में पशुपालकों ने हिस्सा लिया और पशुपालन तथा डेयरी क्षेत्र से जुड़ी घोषणाएं भी की गईं।

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