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‘अरुणाचल भारत की एकता का अभिन्न हिस्सा’, विधानसभा के विशेष सत्र में बोले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

On: September 9, 2026
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विधानसभा के विशेष सत्र में बोले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
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ईटानगर/9 सितंबर 2026। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत की एकता का अभिन्न हिस्सा है और पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के विकास का एक प्रमुख इंजन बनकर उभर रहा है। अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की रणनीतिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक अहमियत का उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत पूर्वोत्तर को देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को भारत की सीमाओं का गौरवपूर्ण रक्षक बताते हुए कहा कि राज्य की प्रगति देश की समग्र प्रगति से गहराई से जुड़ी हुई है।

अरुणाचल प्रदेश में विकास की असीम संभावनाएं

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध राज्य है और यहां विकास की “असीम संभावनाएं” मौजूद हैं। उनके मुताबिक पूर्वोत्तर क्षेत्र को केंद्र सरकार की नीतियों में लगातार प्राथमिकता मिलती रही है।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए मंत्रालय की स्थापना की गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति ने इस क्षेत्र की भूमिका को और व्यापक बनाया है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को ‘अष्ट लक्ष्मी’ के रूप में संबोधित किए जाने का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर अब देश की वृद्धि के प्रमुख चालकों में शामिल हो रहा है।

पूर्वोत्तर के लिए 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास से जुड़े मंत्रालय के लिए 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की ओर से पूर्वोत्तर पर निरंतर दिए जा रहे ध्यान का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य पूर्वोत्तर को देश की मुख्य विकासधारा से और मजबूती से जोड़ना है।

करीब 79 प्रतिशत वन क्षेत्र वाला राज्य

अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य में लगभग 79 प्रतिशत वन आवरण है। जैव विविधता, घने जंगल, नदियां और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र अरुणाचल को देश के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य के ये संसाधन केवल स्थानीय महत्व के नहीं हैं, बल्कि भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। विकास के साथ प्राकृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

कीवी उत्पादन और किसानों की उपलब्धियों का किया उल्लेख

उपराष्ट्रपति ने राज्य की कृषि उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश का नंबर एक कीवी फल उत्पादक राज्य बन गया है।

उन्होंने किसानों को जारी किए गए मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक राज्य में किसानों को एक लाख से अधिक मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कृषि क्षेत्र में ऐसी पहल किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर बेहतर कृषि प्रबंधन में मदद कर सकती है।

राधाकृष्णन ने विकास के साथ स्थानीय और देशी संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक प्रगति के साथ राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखना जरूरी है।

कांग्रेस ने नियुक्ति नहीं मिलने पर जताया विरोध

वहीं, उपराष्ट्रपति के विधानसभा विशेष सत्र में संबोधन के बीच कांग्रेस ने उनसे मुलाकात के लिए नियुक्ति नहीं मिलने को लेकर विरोध जताया। पार्टी ने दावा किया कि उसे राज्य से जुड़े छह प्रमुख मुद्दों पर ज्ञापन सौंपने से रोका गया।

कांग्रेस के अनुसार, ज्ञापन में सीमा सुरक्षा, संवैधानिक सुरक्षा और मेगा डैम परियोजनाओं के विरोध समेत कई मुद्दे शामिल थे। पार्टी का कहना है कि उसने 4 सितंबर को मुख्य सचिव के माध्यम से उपराष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विधानसभा के विशेष सत्र में उपराष्ट्रपति का संबोधन अरुणाचल प्रदेश के विकास, पूर्वोत्तर की भूमिका और राज्य की रणनीतिक एवं पर्यावरणीय अहमियत पर केंद्रित रहा। एक ओर जहां केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को विकास की नई धुरी के रूप में आगे बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष राज्य की सुरक्षा, संवैधानिक प्रावधानों और बड़े बांधों जैसी परियोजनाओं से जुड़े सवाल उठा रहा है।

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