राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह में CM योगी बोले- निरंकुश सरकार ने चलवाई थीं गोलियां, शेर की तरह डटे रहे सिंघल

On: September 27, 2026
Follow Us:
अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह में योगी बोले- शेर की तरह डटे रहे सिंघल
---Advertisement---

लखनऊ/27 सितंबर 2026: राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर रविवार को लखनऊ में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके योगदान को याद किया। विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के कठिन दौर में अशोक सिंघल ने कार्यकर्ताओं को नेतृत्व और दिशा दी।

लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचते ही जय श्रीराम के नारे गूंजने लगे। अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में लोग कफन बांधकर आंदोलन में उतरे थे।

अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह में योगी ने याद किया 1990 का दौर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2 नवंबर 1990 को राम नाम का जाप करते हुए आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और गोली चलाए जाने की घटना के बीच अशोक सिंघल डटे रहे। योगी ने कहा कि जब तत्कालीन सरकार ने आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग किया, तब सिंघल ने पीछे हटने के बजाय नेतृत्व किया।

उन्होंने कहा कि उस समय आंदोलन से जुड़े लोगों को एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता थी, जो मुश्किल परिस्थितियों में उनके साथ खड़ा रहे। योगी के मुताबिक, अशोक सिंघल ने यह भूमिका निभाई और बड़ी संख्या में लोगों को आंदोलन से जोड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंघल का उद्देश्य केवल आंदोलन तक सीमित नहीं था। उन्होंने शिक्षा, सेवा और सामाजिक कार्यों को भी आगे बढ़ाया। योगी ने विशेष रूप से एकल विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों के जरिए जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का काम किया गया।

सनातन धर्म की सुरक्षा को बताया सिंघल का प्रमुख ध्येय

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों के लिए समर्पित रहा। उनके अनुसार, सिंघल का एक प्रमुख संकल्प था कि सनातन परंपरा की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम जन्मभूमि से जुड़े लंबे संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1528 के बाद से राम जन्मभूमि को लेकर संघर्ष की अलग-अलग धाराएं चलती रहीं और संतों, धर्माचार्यों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों ने इस विषय को जीवित रखा।

गोसेवा और गोसंरक्षण पर भी बोले मुख्यमंत्री

समारोह में मुख्यमंत्री ने गोसंरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के सान्निध्य में उन्होंने गोसेवा से जुड़े कार्यों को समझा और अब उन्हें सरकारी स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में 7,700 से अधिक गोशालाओं के निर्माण का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि इन गोशालाओं में 16 लाख से अधिक गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था की गई है और सरकार की ओर से प्रति गोवंश प्रतिमाह 1,500 रुपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन आंकड़ों का उल्लेख मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में किया।

उन्होंने यह भी कहा कि गोसंरक्षण केवल भाषण या सड़क पर आंदोलन का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार और सेवा के स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

जीआई उत्पादों और स्थानीय शिल्प का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार को और व्यापक बनाया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को बड़े बाजार तक पहुंच मिल सके।

मिलिंद परांडे ने सुनाया शिलान्यास का प्रसंग

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने समारोह में अशोक सिंघल के सामाजिक समरसता और सेवा कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज में मौजूद सामाजिक विषमताओं और व्यवहार संबंधी दोषों को दूर करने के लिए संतों ने लगातार प्रयास किए और अशोक सिंघल ने भी इस दिशा में काम किया।

परांडे ने राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उस अवसर पर अनेक जगद्गुरु और धर्माचार्य मौजूद थे। इसके बावजूद अशोक सिंघल ने आग्रह किया था कि शिलान्यास कामेश्वर चौपाल के हाथों से कराया जाए। उनके अनुसार, यह सामाजिक समरसता के संदेश से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रसंग था।

उन्होंने बताया कि अशोक सिंघल ने विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से सेवा गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दिया। जनजातीय क्षेत्रों में एकल विद्यालयों के विस्तार और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने देश-विदेश में प्रवास भी किया।

कौन थे अशोक सिंघल?

अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। बाद में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने। 1980 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारी दी गई और 1984 में वे संगठन के महासचिव बने। बाद के वर्षों में उन्होंने विश्व हिंदू परिषद में शीर्ष दायित्वों पर काम किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल संगठन के प्रमुख चेहरों में रहे। आंदोलन के लिए जनसमर्थन जुटाने और कारसेवा से जुड़े अभियानों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहने के बाद 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम में उनका निधन हुआ।

विश्व हिंदू परिषद ने 27 सितंबर 2026 को उनके जन्म के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम शुरू किए हैं। संगठन की ओर से इसे पूरे वर्ष विभिन्न सामाजिक, सेवा और जनजागरण गतिविधियों से जोड़ने की बात कही गई है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now