गुवाहाटी (Thu, 07 May 2026)। असम में नई सरकार के गठन की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। राज्य में 12 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह भव्य कार्यक्रम गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटनरी फील्ड में होगा। खास बात यह है कि इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। राज्य के मुख्य सचिव रवि कोटा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।
असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को लगातार तीसरी बार स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव परिणामों ने यह संकेत लगभग साफ कर दिया है कि हिमंत बिस्व सरमा एक बार फिर राज्य की कमान संभालेंगे।
शपथ ग्रहण को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
मुख्य सचिव रवि कोटा ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक (DGP), प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, वीवीआईपी मूवमेंट, प्रोटोकॉल और कार्यक्रम के समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। चूंकि समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है, इसलिए प्रशासन किसी भी स्तर पर चूक नहीं चाहता।
राजधानी गुवाहाटी में पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। समारोह स्थल के आसपास विशेष निगरानी रखी जा रही है और ट्रैफिक प्लान को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है।
भाजपा विधायक दल की बैठक पर टिकी निगाहें
नई सरकार के गठन से पहले भाजपा संसदीय दल के नेता के चुनाव को लेकर भी हलचल तेज है। पार्टी हाईकमान ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
माना जा रहा है कि विधायक दल की बैठक में औपचारिक रूप से हिमंत बिस्व सरमा के नाम पर मुहर लगाई जाएगी। हालांकि पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन राजनीतिक संकेत पूरी तरह उनके पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
असम विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 126 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज कर मजबूत जनादेश हासिल किया है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के इस प्रदर्शन को पूर्वोत्तर की राजनीति में बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
लोकतांत्रिक परंपरा निभाते हुए सरमा ने सौंपा इस्तीफा
चुनाव परिणामों की अधिसूचना जारी होने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए मंत्रिपरिषद ने इस्तीफा दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा विधानसभा को भंग करने की सिफारिश भी की, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। हालांकि नई सरकार के गठन तक वर्तमान सरकार को कार्यवाहक सरकार के रूप में काम जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने विकास, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संतुलन के मुद्दों पर चुनाव लड़ा, जिसका फायदा गठबंधन को स्पष्ट रूप से मिला। अब 12 मई का शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा के लिए पूर्वोत्तर में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रतीक भी माना जा रहा है।












