अयोध्या/7 नवंबर 2026: अयोध्या में दीपोत्सव के 10वें संस्करण के दौरान उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीरामजन्मभूमि मंदिर को हिंदू स्वाभिमान का स्मारक बताया। रामकथा पार्क में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण होना ही चाहिए था। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े साधु-संतों और रामभक्तों के त्याग को याद करते हुए कहा कि करीब 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर स्थापित है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और साधु-संत मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति ने इस दौरान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में हुए बदलावों की भी सराहना की।
श्रीराम मंदिर हिंदू स्वाभिमान का स्मारक: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मंदिर और हिंदू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना में साधु-संतों तथा संन्यासियों ने जो त्याग किया है, उसे हिंदू समाज कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि धर्म, करुणा, सदाचार और आदर्श आचरण के शाश्वत प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन सिखाता है कि सच्ची महानता सत्ता और पद में नहीं, बल्कि चरित्र की दृढ़ता और कर्तव्य के प्रति समर्पण में होती है। भगवान श्रीराम ने व्यक्तिगत सुख से ऊपर कर्तव्य, निजी हित से ऊपर धर्म और प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी श्रीराम के दिखाए मार्ग पर चलकर जनसेवा में जुटे हैं।
‘श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बनता तो फिर कहां बनता?’
रामकथा पार्क में अपने संबोधन के दौरान उपराष्ट्रपति ने राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर बनाने में सदियां लग गईं। उन्होंने सवाल किया कि अगर भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बनता, तो फिर कहां बनता?
उन्होंने कहा कि सदियों तक रामभक्तों ने इंतजार किया और संघर्ष किया। आखिरकार श्रीराम की जीत हुई और आज उनकी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर स्थापित है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि सभी के पूजनीय हैं।
उनके इस संबोधन में राम मंदिर आंदोलन के लंबे इतिहास और उससे जुड़ी आस्था का उल्लेख प्रमुखता से रहा।
रामभक्तों के त्याग से संभव हुआ ऐतिहासिक बदलाव
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू समाज में जन्म के आधार पर कोई बड़ा नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की श्रेष्ठता उसके चरित्र से तय होती है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने रामायण की रचना कर समाज को दिशा दी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वयं के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों का उच्च पदों तक पहुंचना समाज में आए बदलाव का संकेत है।
उपराष्ट्रपति के अनुसार, अयोध्या आंदोलन और रामभक्तों के महान त्याग व बलिदान ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मां के शिलापूजन से अयोध्या तक का सफर किया याद
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी अपनी निजी स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब अशोक सिंघल ने देशभर में शिलापूजन का आह्वान किया था, तब उनके गृहक्षेत्र में उनकी मां पूजा समिति की प्रमुख बनी थीं।
उनकी मां सिर पर ईंट रखकर पूरे क्षेत्र में गई थीं और अंत में अपने गृहनगर के गणेश मंदिर में शिलापूजन संपन्न कराया था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उस समय उनकी मां ने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन भारत के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचेगा और अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव में शामिल होगा।
यह प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी जनभावनाओं और परिवारों के योगदान को याद किया।
योगी आदित्यनाथ के साथ संसद में बिताए दिनों का जिक्र
उपराष्ट्रपति ने देश की एकता और भौगोलिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सुदूर पश्चिम गुजरात से आती हैं, जबकि वह स्वयं दक्षिण भारत में रामेश्वरम के निकट से यहां पहुंचे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संसद में बिताए पुराने दिनों को भी याद किया। उपराष्ट्रपति ने बताया कि करीब 30 वर्ष पहले दोनों युवा सांसद थे और सदन में पास-पास बैठते थे।
उन्होंने कहा कि उस समय योगी आदित्यनाथ के भाषणों में जो ओजस्विता और प्रभाव था, आज भी उनमें वही ऊर्जा बरकरार है।
योगी सरकार में कानून-व्यवस्था के बदलाव की सराहना
उपराष्ट्रपति ने केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों ने मिलकर असंभव को संभव बनाया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले प्रदेश में लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं था।
उन्होंने कहा कि पहले कानून-व्यवस्था पुलिस के हाथ में होने के बजाय गुंडों और उपद्रवियों के नियंत्रण में थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्थिति बदली है। उनके मुताबिक, आज बेटियों की सुरक्षा को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है और महिलाएं रात में भी निडर होकर बाहर निकल सकती हैं।
वाराणसी के दुकानदार का उदाहरण देकर बताया बदलाव
उपराष्ट्रपति ने हाल में वाराणसी के एक छोटे दुकानदार से हुई बातचीत का प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि दुकानदार ने कहा कि अब प्रदेश में किसी को डर नहीं है और बेटियां आधी रात को भी निडर होकर सड़क पर चल सकती हैं।
जब उपराष्ट्रपति ने उससे पूछा कि वह इतने विश्वास से यह बात कैसे कह रहा है, तो दुकानदार ने बताया कि योगी सरकार से पहले वह स्वयं उपद्रवी और असामाजिक गतिविधियों में शामिल था। अब किसी पर हाथ उठाने की गुंजाइश नहीं है, इसलिए उसने अपनी पुरानी गतिविधियां छोड़कर छोटी दुकान खोल ली है।
दुकानदार के मुताबिक, अब वह अपने कारोबार से परिवार का सम्मानपूर्वक भरण-पोषण कर रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल एक दुकानदार का अनुभव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में आए सकारात्मक बदलाव की कहानी है। एक व्यक्ति, जो कभी उपद्रवी था, आज छोटा व्यापारी बनकर अपने परिवार का सहारा बना हुआ है।
दीपोत्सव में आस्था, संस्कृति और विकास का संदेश
अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में उपराष्ट्रपति का संबोधन राम मंदिर निर्माण, रामभक्तों के त्याग, सांस्कृतिक गौरव और उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों पर केंद्रित रहा।
उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में कर्तव्य, सेवा तथा सदाचार की भावना मजबूत करने का संदेश दिया। अयोध्या में दीपों की जगमगाहट के बीच आयोजित यह समारोह धार्मिक आस्था के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक परिवर्तन के विमर्श का भी मंच बना।









