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भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, प्रशांत महासागर से आतंकवाद तक साथ मिलकर करेंगे काम

On: July 11, 2026
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भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती
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नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के साथ भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते एक नए रणनीतिक दौर में प्रवेश कर गए हैं। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि प्रशांत महासागर भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है और इस क्षेत्र में न्यूजीलैंड को एक भरोसेमंद तथा समान सोच वाला साझेदार माना जाता है।

विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने शनिवार को कहा कि दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शांति को भी मजबूत करना है।

प्रशांत महासागर में क्यों अहम है भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी?

नई दिल्ली में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि भारत हिंद महासागर का प्रमुख देश होने के नाते अपने समुद्री क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है। वहीं, प्रशांत महासागर भी भारत की सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से न्यूजीलैंड को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक विश्वसनीय और समान सोच वाला सहयोगी मानता रहा है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्तों को नई गति मिली है और अब इन्हें रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक विस्तारित किया गया है।

इंडो-पैसिफिक में साझा सोच पर बढ़ेगा सहयोग

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और न्यूजीलैंड दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थक हैं। रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि दोनों देशों का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और मुक्त एवं सुरक्षित समुद्री परिवहन को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के देशों के रूप में दोनों के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध समय की आवश्यकता हैं और यही इस साझेदारी की आधारशिला है।

समुद्री सहयोग को मिलेगा नया संस्थागत ढांचा

रुद्रेंद्र टंडन ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग से संबंधित एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब उसी समझौते के तहत समुद्री सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक नया तंत्र विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे समुद्री सुरक्षा, सूचना साझा करने, क्षमता निर्माण और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को संस्थागत स्वरूप मिलेगा।

आतंकवाद पर भारत और न्यूजीलैंड एक सुर में

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के खिलाफ दोनों देशों की सोच पूरी तरह समान है। रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताता रहा है और न्यूजीलैंड भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर मिलकर आगे बढ़ेंगे और किसी भी प्रकार के हिंसक उग्रवाद के लिए कोई स्थान नहीं होगा।

संयुक्त कार्य समूह करेगा आतंकवादी नेटवर्क पर कार्रवाई

भारत विरोधी गतिविधियों और वर्ष 2024 में न्यूजीलैंड में आयोजित खालिस्तान जनमत संग्रह से जुड़े सवाल पर रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह केवल एक औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आतंकवादी नेटवर्क और उनके समर्थन तंत्र को कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश आतंकवादी संगठनों, उनकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के पक्षधर हैं।

आतंकी फंडिंग रोकने पर भी बनी सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के हर स्वरूप और सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई। दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुई आतंकी घटना की भी स्पष्ट शब्दों में निंदा की।

संयुक्त बयान में आतंकियों की फंडिंग रोकने, सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों तथा उनके वित्तीय समर्थकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) सहित बहुपक्षीय मंचों के प्रभावी उपयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।

भारत और न्यूजीलैंड ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद से मुकाबले में किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड स्वीकार्य नहीं होंगे और इस चुनौती से निपटने के लिए समान, निष्पक्ष और समन्वित वैश्विक नीति अपनाना आवश्यक है।

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