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जेपी सार्वजनिक पुस्तकालय के उद्घाटन पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- जयप्रकाश नारायण ने चंबल में 250 से अधिक डाकुओं का कराया था सरेंडर

On: July 11, 2026
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जेपी सार्वजनिक पुस्तकालय के उद्घाटन पर अमित शाह का बड़ा बयान
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नई दिल्ली, 11 जुलाई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली में जेपी सार्वजनिक पुस्तकालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के सामाजिक, लोकतांत्रिक और राष्ट्र निर्माण में योगदान को विस्तार से याद किया। अपने संबोधन में शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि ऐसे जननेता थे जिन्होंने सत्ता से अधिक समाज को महत्व दिया और अपने विचारों से देश की दिशा बदलने का काम किया।

उन्होंने कहा कि चंबल क्षेत्र में 250 से अधिक डाकुओं के आत्मसमर्पण में जेपी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके प्रयासों से चार राज्यों के 22 जिलों में डकैती की समस्या को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली।

आजादी से आपातकाल तक हर दौर में निभाई अहम भूमिका

अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख सेनानियों में शामिल थे। आजादी के बाद उन्होंने सत्ता का रास्ता चुनने के बजाय समाज सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया, समाजवादी कांग्रेस का गठन किया और विनोबा भावे के भूदान आंदोलन तथा सर्वोदय आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य किया।

गृह मंत्री ने कहा कि 1975 के आपातकाल के दौरान जेपी लोकतंत्र की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे। बिहार और गुजरात के छात्र आंदोलनों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी सहित हजारों विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया था। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध पंक्ति—“अंधेरे में एक प्रकाश, जयप्रकाश”—का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नारा उस दौर में लोकतंत्र की पहचान बन गया था।

‘देश का भविष्य पुस्तकालयों से तय होता है’

अपने संबोधन में अमित शाह ने पुस्तकालयों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य केवल कृषि, उद्योग या बाजार से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में पढ़ने आने वाले युवाओं की संख्या से तय होता है। ज्ञान और विवेक ही राष्ट्र निर्माण की असली ताकत हैं और इनकी सबसे मजबूत नींव पुस्तकालयों में रखी जाती है।

उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से पुस्तकालय जाने और पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील करते हुए कहा कि अध्ययन व्यक्ति में सही और गलत का विवेक पैदा करता है।

अपने बचपन का अनुभव भी किया साझा

गृह मंत्री ने बताया कि जिस छोटे कस्बे में उनका बचपन बीता, वहां एक समृद्ध पुस्तकालय था। वहीं से उनकी अध्ययन यात्रा शुरू हुई और धीरे-धीरे वेदों, उपनिषदों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय ने उनके व्यक्तित्व और सोच को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘बोलने से पहले पढ़ना और सोचना जरूरी’

अमित शाह ने पुस्तकालय परिसर में लिखे एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लिखा था—“बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते।”

उन्होंने इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सही सोच विकसित करने के लिए पढ़ना आवश्यक है। पढ़ने की संस्कृति व्यक्ति को संतुलित विचार और जिम्मेदार अभिव्यक्ति का संस्कार देती है।

हर गांव तक पहुंच रही पुस्तकालय व्यवस्था

गृह मंत्री ने बताया कि अपने संसदीय क्षेत्र में उन्होंने लगभग हर गांव में छोटे पुस्तकालय स्थापित कराए हैं, जहां 3 से 4 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। इन पुस्तकालयों को एक केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ा गया है, जिसमें लगभग सवा लाख पुस्तकें हैं।

उन्होंने बताया कि चार मोबाइल लाइब्रेरी वैन भी संचालित की जा रही हैं। गांवों के बच्चे अपनी पसंद की पुस्तक का नाम भेजते हैं और प्रत्येक शुक्रवार को वह पुस्तक उनके गांव तक पहुंचा दी जाती है। साथ ही इन पुस्तकालयों को स्थानीय स्कूलों से भी जोड़ा गया है।

दिल्ली सरकार से पुस्तकालय नेटवर्क मजबूत करने की अपील

अमित शाह ने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि राजधानी के सभी सार्वजनिक पुस्तकालयों को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ा जाए और स्कूलों के साथ उनका समन्वय बढ़ाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि नई दिल्ली के आसपास के 10 विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क कर छात्रों को पुस्तकालयों से जोड़ने का विशेष अभियान चलाया जाए।

30 हजार से अधिक पुस्तकें, 1 करोड़ ई-बुक्स की सुविधा

नवनिर्मित जेपी सार्वजनिक पुस्तकालय आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां 30 हजार से अधिक मुद्रित पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है, जबकि ई-लाइब्रेरी के माध्यम से एक करोड़ से अधिक डिजिटल पुस्तकों तक निःशुल्क पहुंच मिलेगी।

पुस्तकालय में रिसर्च सेंटर, आधुनिक रीडिंग एरिया, किड्स जोन, बहुउद्देशीय सभागार, मुफ्त वाई-फाई, आरएफआईडी आधारित पुस्तक प्रबंधन प्रणाली और नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से जुड़ा ओपेक कैटलॉग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अध्ययन के लिए आने वाले पाठकों के लिए डिजिटल मॉनिटर भी लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वे नोट्स तैयार कर सकते हैं और अध्ययन सामग्री डाउनलोड कर सकते हैं।

इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष केशव चंद्र सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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