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नौकरी से रक्षा और परमाणु ऊर्जा तक, भारत-स्विट्जरलैंड के बीच बड़ा करार; आम लोगों को क्या मिलेगा?

On: October 5, 2026
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नौकरी से रक्षा और परमाणु ऊर्जा तक, भारत-स्विट्जरलैंड के बीच बड़ा करार
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नई दिल्ली (सोमवार, 5 अक्टूबर 2026): भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्तों में सोमवार को एक नया अध्याय जुड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में व्यापार, निवेश, रोजगार, तकनीक, बुनियादी ढांचे, रक्षा और परमाणु ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने पांच अहम समझौतों और व्यवस्थाओं पर हस्ताक्षर किए।

हालांकि, यहां एक फर्क समझना जरूरी है। रक्षा उत्पादन और परमाणु ऊर्जा पर सहमति बनी है, लेकिन सोमवार को हस्ताक्षर किए गए पांच समझौतों में इन दोनों क्षेत्रों का अलग समझौता शामिल नहीं है। औपचारिक रूप से हुए समझौतों का बड़ा हिस्सा लोगों की आवाजाही, युवा पेशेवरों, परिवहन, वैज्ञानिक शोध, स्टार्टअप और तकनीकी सहयोग से जुड़ा है।

भारत-स्विट्जरलैंड समझौते से आपको क्या मिलेगा?

इस पूरी साझेदारी का सबसे सीधा असर भारतीय छात्रों, युवा पेशेवरों, कारोबारियों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों के लिए दिखाई दे सकता है। खासकर Migration and Mobility Partnership और Young Professionals Agreement लोगों के बीच आवाजाही के रास्ते को आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Migration and Mobility Partnership के तहत पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक रहने की सुविधा होगी। एक साल के नवीकरणीय छात्र परमिट का भी प्रावधान है। समझौते का उद्देश्य नियमित और व्यवस्थित आवाजाही के साथ अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और शोषण की रोकथाम में सहयोग करना भी है।

यानी स्विट्जरलैंड जाने की योजना बनाने वाले भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए यह केवल कूटनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि व्यावहारिक महत्व वाला कदम है।

युवा पेशेवरों को स्विट्जरलैंड में काम का मौका

Young Professionals Scheme यानी YPS युवाओं के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। इसके तहत दोनों देशों के युवा पेशेवर दूसरे देश में अस्थायी रोजगार हासिल कर अपने क्षेत्र में व्यावसायिक और भाषा कौशल विकसित कर सकेंगे।

शुरुआत में हर देश से हर साल 300 लोगों का आदान-प्रदान होगा। जरूरत और अनुभव के आधार पर इसे बढ़ाकर 500 लोगों तक किया जा सकता है।

इसका मतलब साफ है—भारत के युवा पेशेवरों को स्विट्जरलैंड में सीमित अवधि के लिए काम करके अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा।

भारत के किसानों, फार्मा और टेक्सटाइल कारोबार को भी फायदा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत स्विट्जरलैंड के बाजार में भारतीय निर्यात को बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को आसान बनाने के लिए कदम उठा रहा है। इससे कृषि उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

दूसरी तरफ भारत स्विट्जरलैंड से बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में नए निवेश आकर्षित करना चाहता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश मिलकर विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में भी काम करेंगे। ऐसे में इस साझेदारी का असर केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि कंपनियों, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी दिखाई दे सकता है।

रक्षा क्षेत्र में भी खुलेगा सहयोग का रास्ता

भारत और स्विट्जरलैंड ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की नई संभावनाओं की पहचान की है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने मिलिट्री एक्सचेंज और रक्षा उत्पादन में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की है।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक तकनीकी साझेदारियों का विस्तार करने पर जोर दे रहा है। स्विट्जरलैंड के साथ सहयोग से तकनीक, डिजाइन, उत्पादन और सैन्य आदान-प्रदान के संभावित नए रास्ते खुल सकते हैं।

लेकिन फिलहाल इसे किसी बड़े रक्षा सौदे के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। अभी उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इसे सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान और आगे बढ़ाने की सहमति के तौर पर बताया गया है।

परमाणु ऊर्जा सहयोग भी होगा मजबूत

दोनों देशों ने न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त बयान में इसकी पुष्टि की।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, सोमवार को घोषित पांच औपचारिक समझौतों की सूची में परमाणु ऊर्जा का अलग MoU शामिल नहीं है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में स्विस तकनीक का इस्तेमाल

भारत और स्विट्जरलैंड ने परिवहन, मोबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित समझौता भी किया है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, सुरंगों और परिवहन तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं शामिल हैं।

वाराणसी रोपवे, नोएडा के जेवर एयरपोर्ट और पहाड़ी क्षेत्रों में रेलवे तथा टनल परियोजनाओं को दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचा सहयोग के उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री ने सामने रखा।

भारत ने स्विस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को देश में बड़े पैमाने पर निवेश करने तथा क्षमता निर्माण, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग में भागीदारी का भी निमंत्रण दिया है।

रिसर्च, स्टार्टअप और तकनीक को भी बढ़ावा

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच विज्ञान एवं तकनीक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी कई पहल हुई हैं। स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच दीर्घकालिक शोध सहयोग के लिए आशय पत्र हुआ है।

इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और उद्यमिता में सहयोग की व्यवस्था की गई है। इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए Indo-Swiss Academia-Industry Training कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसका फायदा भारत के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और तकनीकी संस्थानों को लंबे समय में मिल सकता है।

15 साल में 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य

भारत-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के लागू होने के बाद दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को बड़ा लक्ष्य दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, भारत में अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है।

यही वजह है कि गाइ पार्मेलीन की यात्रा को केवल राजनयिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इसके पीछे व्यापार, निवेश, तकनीक और रोजगार का एक बड़ा आर्थिक एजेंडा भी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक शांति पर भी चर्चा

मोदी और पार्मेलीन की बातचीत में यूक्रेन और पश्चिम एशिया समेत वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखता है तथा वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए काम करता रहेगा।

भारत ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में होने वाले सार्थक प्रयासों का समर्थन करने की अपनी नीति भी दोहराई।

आम भारतीय के लिए इस डील का मतलब क्या?

अगर इसे सीधे आम लोगों की नजर से देखें तो इस साझेदारी के तीन सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं—रोजगार और पेशेवर अवसर, भारतीय उत्पादों के लिए बाजार और स्विस निवेश।

युवा पेशेवरों के लिए स्विट्जरलैंड में अस्थायी रोजगार और कौशल हासिल करने का रास्ता खुल रहा है। भारतीय कंपनियों के लिए कृषि, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। वहीं स्विस कंपनियों के निवेश से भारत में तकनीक, बुनियादी ढांचे और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

दूसरे शब्दों में, भारत-स्विट्जरलैंड रिश्ते अब सिर्फ पर्यटन और स्विस बैंकों की चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। रक्षा, परमाणु ऊर्जा, निवेश, रोजगार, रिसर्च और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर—इन सभी क्षेत्रों में दोनों देश अपनी साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

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