नई दिल्ली, 5 मई 2026 (मंगलवार): राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। BJP सरकार गठन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी आलाकमान ने पश्चिम बंगाल और असम जैसे अहम राज्यों में विधायक दल के नेता के चयन के लिए अपने सबसे भरोसेमंद चेहरों को मैदान में उतार दिया है।
यह फैसला केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि नेतृत्व चयन में रणनीति और संतुलन दोनों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
BJP सरकार गठन: बंगाल में अमित शाह के हाथ में कमान
पश्चिम बंगाल, जहां राजनीति हमेशा से तीखी और बहुस्तरीय रही है, वहां BJP सरकार गठन की प्रक्रिया को संभालने की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपी गई है।
उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है।
यह जोड़ी केवल औपचारिक नियुक्ति नहीं है। अमित शाह की रणनीतिक पकड़ और संगठनात्मक कौशल किसी से छिपा नहीं है। वहीं, मोहन चरण माझी का जमीनी अनुभव इस प्रक्रिया को संतुलित बनाने में मदद करेगा।
बंगाल में पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल नेता चुनना नहीं, बल्कि एक ऐसा चेहरा सामने लाना है जो विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रभावी भूमिका निभा सके।
असम में BJP सरकार गठन की जिम्मेदारी जेपी नड्डा के पास
पूर्वोत्तर के राजनीतिक परिदृश्य में असम की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। यहां BJP सरकार गठन की प्रक्रिया को मजबूत और विवादरहित बनाने के लिए पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह दोनों नेता असम जाकर नवनिर्वाचित विधायकों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे। हर विधायक की राय को महत्व दिया जाएगा, ताकि नेता का चयन केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि सर्वसम्मति और संतुलन के साथ हो।
नेतृत्व चयन में दिखेगा ‘सहमति मॉडल’
दिलचस्प बात यह है कि इस बार पार्टी केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहती।
BJP सरकार गठन के तहत जो रणनीति अपनाई जा रही है, उसमें ‘सहमति मॉडल’ को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसका मतलब साफ है—
- गुटबाजी को रोकना
- क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करना
- और एक मजबूत, स्वीकार्य नेतृत्व सामने लाना
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह तरीका पार्टी को लंबे समय तक स्थिरता दे सकता है।
राजनीतिक संदेश भी छिपा है इस फैसले में
इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने एक और संदेश देने की कोशिश की है—
कि पार्टी नेतृत्व चयन को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की आंतरिक खींचतान से बचना चाहती है।
अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे शीर्ष नेताओं की सीधी भागीदारी यह दर्शाती है कि पार्टी इन राज्यों को भविष्य की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मान रही है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, BJP सरकार गठन की प्रक्रिया अब केवल औपचारिकता नहीं रही, बल्कि एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बंगाल और असम में आखिर किसे विधायक दल का नेता चुना जाता है—और वह चेहरा आने वाले राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में ले जाता है।













