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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने गिनाईं खामियां, कहा- सामाजिक संतुलन बनाए रखना जरूरी

On: August 13, 2026
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने गिनाईं खामियां
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झांसी/13 अगस्त 2026: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करने के साथ ही विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर भी गंभीरता से ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि इस बार भी छात्राओं ने सर्वाधिक स्वर्ण पदक और उपाधियां हासिल की हैं, जो उत्साहजनक है। हालांकि, समाज में समानता बनाए रखने के लिए संतुलन भी जरूरी है। असंतुलन की स्थिति में आगे चलकर दूसरी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

कुलाधिपति ने समारोह के दौरान विश्वविद्यालय में राजभवन की टीम के निरीक्षण में सामने आई कमियों का भी बिंदुवार उल्लेख किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इन खामियों को समय रहते दूर करने की सलाह दी, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाएं मिल सकें।

सामाजिक संतुलन जरूरी, छात्राओं की सफलता पर कुलाधिपति ने जताई खुशी

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं की सफलता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्राओं का शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना अच्छी बात है। इस बार भी छात्राओं ने सबसे अधिक स्वर्ण पदक और उपाधियां प्राप्त की हैं।

उन्होंने सामाजिक संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए गुजरात का एक प्रसंग भी साझा किया। कुलाधिपति ने बताया कि गुजरात में एक स्थान पर महिला छात्रावास बनाया गया था। इसके बाद वहां से पढ़-लिखकर निकलने वाली लड़कियों के लिए अच्छे वर की तलाश उनके परिवारों के सामने चुनौती बन गई।

उन्होंने इस उदाहरण के जरिए कहा कि बेटियों को पढ़ाना और उन्हें सक्षम बनाना जरूरी है, लेकिन समाज में संतुलन भी बना रहना चाहिए। छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर बनने और किसी भी गलत व्यवहार का दृढ़ता से जवाब देने की बात कही।

राजभवन की टीम ने जो खामियां पकड़ीं, उन्हें दूर करने के निर्देश

कुलाधिपति ने अपने संबोधन में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में राजभवन की टीम के निरीक्षण के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन कमियों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधार किया जाना चाहिए।

उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रावासों में खानपान की व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश दिए। कुलाधिपति के मुताबिक, समता हॉस्टल को छोड़कर बाकी चार छात्रावासों में भोजन की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित भोजन उपलब्ध कराने को कहा।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की दिनचर्या सीधे तौर पर वहां मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी होती है। भोजन की गुणवत्ता में कमी का असर छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई, दोनों पर पड़ सकता है।

आर्किटेक्ट विभाग की लिफ्ट को लेकर भी जताई नाराजगी

कुलाधिपति ने आर्किटेक्ट विभाग में लगी लिफ्ट के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लिफ्ट का इस्तेमाल केवल शिक्षकों तक सीमित रखना उचित नहीं है। इसे विद्यार्थियों के लिए भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि भवन के पहले दो तल के अलावा बाकी तल भी छात्रों के लिए खोले जाने चाहिए। विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

कुलाधिपति की यह टिप्पणी विश्वविद्यालय में सुविधाओं की समान उपलब्धता के मुद्दे की ओर भी इशारा करती है। जब कोई संसाधन विद्यार्थियों की आवाजाही और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा हो, तो उसका इस्तेमाल केवल एक वर्ग तक सीमित रखने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फार्मेसी विभाग के पास सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश

दीक्षांत समारोह के दौरान कुलाधिपति ने फार्मेसी विभाग के पास पड़ी गंदगी का भी उल्लेख किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वहां तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए।

विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक परिसर में साफ-सफाई केवल सुंदरता का विषय नहीं है। यह विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य तथा संस्थान के समग्र वातावरण से भी जुड़ा है। ऐसे में कुलाधिपति ने साफ-सफाई को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी।

विद्यार्थियों की उपलब्धि के साथ व्यवस्थाओं पर भी जोर

कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के संबोधन में एक तरफ छात्राओं की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना रही तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय की बुनियादी व्यवस्थाओं को बेहतर करने का संदेश भी स्पष्ट दिखाई दिया।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को सुधारने के लिए केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखाई देना चाहिए। छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और परिसर में पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बने, यही उच्च शिक्षा संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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