नई दिल्ली/28 सितंबर 2026। CBSE तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों के हित में अहम निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने निर्देश दिया कि कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी गई संक्रमणकालीन छूट का लाभ अब मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी दिया जाए। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा, जिन्हें संशोधित भाषा व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा को लेकर आगे चलकर बोर्ड परीक्षा देने की चिंता थी।
पीठ में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। अदालत में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और CBSE की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पक्ष रखा। अदालत ने यह निर्देश ऐसे समय दिया है, जब CBSE की संशोधित तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं।
CBSE तीन भाषा नीति में कक्षा 6 को क्या राहत मिली?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का सबसे अहम पहलू यह है कि वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को भी वही संक्रमणकालीन छूट मिलेगी, जो कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को पहले से दी गई है। इन छात्रों को भविष्य में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक आकलन के माध्यम से किया जाएगा।
इसका मतलब यह नहीं है कि तीसरी भाषा पढ़ाई ही नहीं जाएगी। छात्र भाषा का अध्ययन कर सकते हैं, लेकिन इस संक्रमणकालीन व्यवस्था में तीसरी भाषा का परिणाम कक्षा 10 में छात्र के पास या फेल होने का आधार नहीं बनेगा।
यानी बच्चों और अभिभावकों को बीच शैक्षणिक सत्र में भाषा व्यवस्था बदलने की चिंता से फिलहाल राहत मिली है।
99 प्रतिशत CBSE स्कूलों में व्यवस्था होने का दावा
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बताया गया कि देश के करीब 99 प्रतिशत CBSE स्कूलों में नई तीन-भाषा व्यवस्था लागू करने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब 28,819 CBSE स्कूलों में लगभग 1.2 प्रतिशत स्कूलों में अभी कुछ सुविधाओं की कमी बताई गई।
केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि भाषा नीति के तहत पाठ्य सामग्री और अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से पाठ्यपुस्तकों और भाषा शिक्षकों की उपलब्धता समेत कई व्यावहारिक दिक्कतों का मुद्दा उठाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को उन स्कूलों की समस्याओं का पता लगाने के लिए अधिकारी नियुक्त करने को भी कहा, जहां अभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
17 सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने दिया था अहम सुझाव
यह मामला अचानक सोमवार को सामने नहीं आया। इससे पहले 17 सितंबर 2026 को भी सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कक्षा 6 में तीन-भाषा नीति लागू करने की समयसीमा पर पुनर्विचार करने को कहा था। उस समय अदालत ने छात्रों को अतिरिक्त समय देने और व्यवस्था को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की संभावना पर विचार करने को कहा था।
अदालत की चिंता मुख्य रूप से उन छात्रों को लेकर थी, जो पहले से एक भाषा व्यवस्था के तहत पढ़ाई कर रहे हैं और उनके लिए बीच सत्र में नई व्यवस्था अपनाना मुश्किल हो सकता है।
क्या है CBSE की तीन भाषा व्यवस्था?
नई व्यवस्था का आधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 है। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ने की व्यवस्था की गई है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
CBSE की सूची में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बांग्ला, पंजाबी, गुजराती, ओडिया और असमिया जैसी भाषाएं भारतीय भाषाओं में शामिल हैं। वहीं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश को गैर-भारतीय भाषाओं की श्रेणी में रखा गया है।
विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में लेने की स्थिति भी संशोधित ढांचे में अलग नियमों के अधीन है।
कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को पहले से मिली थी छूट
CBSE ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वर्तमान कक्षा 7, 8 और 9 के छात्र जब कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तो उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यही संक्रमणकालीन व्यवस्था वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों पर भी लागू होगी।
इस बदलाव का उद्देश्य उन छात्रों को एक जैसी व्यवस्था देना है, जो संशोधित भाषा नीति लागू होने के समय अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ रहे हैं।
CBSE को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए करीब छह सप्ताह बाद की तारीख तय की है। CBSE को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को जवाबी दलील दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा।
अदालत के सामने अभी तीन भाषा नीति से जुड़े व्यापक सवाल भी लंबित हैं। इनमें भाषा चयन, भारतीय और गैर-भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण तथा नीति को लागू करने की व्यावहारिक व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसलिए सोमवार का आदेश मुख्य नीति की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
छात्रों के लिए अभी क्या समझना जरूरी है?
मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि उन्हें कक्षा 7-9 के छात्रों के समान संक्रमणकालीन छूट दी गई है। तीसरी भाषा को लेकर उन्हें आगे चलकर कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा के दबाव से राहत मिलेगी और इसका आकलन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
हालांकि, CBSE तीन भाषा नीति से जुड़े व्यापक मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अभी जारी है। इसलिए आगे आने वाले आदेश और CBSE की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।











