नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से जुड़े CEC-EC नियुक्ति कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर मामला सामने आया है। शीर्ष अदालत बुधवार को उस आवेदन पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई, जिसमें 2023 के कानून को चुनौती देने और मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने से संबंधित हालिया विभाजित फैसले को वापस लेने की मांग की गई है।
मामले में 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ की राय अलग-अलग रही थी। इसके बाद फैसले को वापस लेने की मांग वाला आवेदन अदालत के समक्ष रखा गया है। अब इस पर आगे विचार किए जाने की संभावना है।
CEC-EC नियुक्ति कानून पर क्या है ताजा घटनाक्रम?
बुधवार को प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने फैसला वापस लेने की मांग से जुड़े आवेदन का उल्लेख किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आवेदन पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें इसे प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखने के लिए कहा गया।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम इस पर विचार करेंगे और निर्णय लेंगे।”
इस संक्षिप्त टिप्पणी के साथ अदालत ने संकेत दिया कि आवेदन पर आगे न्यायिक विचार किया जाएगा। हालांकि, बुधवार को इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया।
23 सितंबर को दो जजों की पीठ में रही थी अलग-अलग राय
इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने के सवाल पर अलग-अलग राय व्यक्त की थी।
यानी दोनों न्यायाधीश इस बात पर एकमत नहीं हो सके कि 2023 के कानून को चुनौती देने से जुड़े मुद्दे को बड़ी पीठ के समक्ष भेजा जाना चाहिए या नहीं। इसी विभाजित फैसले को वापस लेने की मांग अब नए आवेदन के जरिए की गई है।
ऐसे में अदालत के सामने अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि इस आवेदन पर किस तरह आगे बढ़ा जाए और पहले दिए गए विभाजित फैसले का क्या प्रभाव रहेगा।
क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल होने की जानकारी
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ता से पूछा कि क्या इस मामले में कोई अन्य अंतरिम आवेदन भी लंबित है।
इस पर गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि एक क्यूरेटिव याचिका भी दायर की गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फैसला वापस लेने की मांग वाला वर्तमान आवेदन उससे अलग है।
इससे मामले में न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग विकल्पों की स्थिति भी सामने आई है। अब अदालत को फैसला वापस लेने की मांग वाले आवेदन पर विचार करना है।
2023 का कानून क्यों है महत्वपूर्ण?
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित 2023 का कानून चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग सीधे देश की चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी संवैधानिक संस्था है, इसलिए उसके शीर्ष पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय रही है।
इसी कारण CEC-EC नियुक्ति कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही न्यायिक कार्यवाही पर भी नजर बनी हुई है। अब अदालत के अगले कदम से यह स्पष्ट होगा कि विभाजित फैसले को वापस लेने की मांग किस दिशा में आगे बढ़ती है।













