नई दिल्ली | Mon, 09 Feb 2026। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन Indian Space Research Organisation (ISRO) ने अपने आगामी चंद्र मिशन के लिए एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। वैज्ञानिकों ने Chandrayaan-4 Landing Site के तौर पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित Mons Mouton क्षेत्र के MM-4 बिंदु को सबसे सुरक्षित और उपयुक्त माना है। यह चयन मुख्यतः Chandrayaan-2 के ऑर्बिटर से मिली उच्च-रेज़ोल्यूशन तस्वीरों और स्थलाकृति (terrain) विश्लेषण पर आधारित है।
Chandrayaan-4 Landing Site क्यों बना MM-4?
MM-4, मॉन्स माउटन का वह हिस्सा है जहां सतह अपेक्षाकृत समतल है और ढलान औसतन ~5° के आसपास है—जबकि प्रस्तावित लैंडर 10° तक के ढलान पर सुरक्षित उतर सकता है। बड़े बोल्डर (boulders) 0.3 मीटर से छोटे पाए गए हैं, जिससे लैंडिंग के दौरान टकराव का जोखिम न्यूनतम रहता है।
इसके अलावा, इस स्थान पर 11–12 दिनों तक लगातार सूर्य प्रकाश मिलने की संभावना बताई गई है, जो सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के लिए निर्णायक लाभ है।
चंद्रयान-2 की तस्वीरों से मिला निर्णायक डेटा
ऑर्बिटर के हाई-रिज़ोल्यूशन कैमरे ने चंद्र सतह को लगभग 32 सेमी/पिक्सल तक की स्पष्टता से दर्ज किया। इसी डेटा से क्रेटर, ढलान, चट्टानों के आकार और सतह की बनावट का सूक्ष्म अध्ययन संभव हुआ। वैज्ञानिकों ने यही अध्ययन अंतरराष्ट्रीय मंच Lunar and Planetary Science Conference (LPSC 2026) में प्रस्तुत भी किया।
लंबी धूप, बेहतर संचार, और ‘वॉटर आइस’ की संभावना
दक्षिणी ध्रुव का यह इलाका उन दुर्लभ स्थानों में है जहां सूर्य की रोशनी लंबी अवधि तक उपलब्ध रहती है। साथ ही, पृथ्वी से सीधा रेडियो संपर्क (line-of-sight communication) अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी पट्टी में जल-बर्फ (water ice) की मौजूदगी की संभावना भी प्रबल है—जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।
मिट्टी-पत्थर के नमूने लौटाने का लक्ष्य
करीब ₹2104 करोड़ लागत वाले इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य चंद्रमा की सतह से मिट्टी और पत्थरों के नमूने पृथ्वी पर वापस लाना है—यानी sample return. इसके लिए दो अलग-अलग रॉकेट प्रक्षेपणों की योजना है, जिनके माध्यम से लैंडर-रोवर और रिटर्न मॉड्यूल समन्वित तरीके से काम करेंगे। अंतिम लैंडिंग बिंदु का फैसला प्रक्षेपण विंडो के समय वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।
भारत के चंद्र कार्यक्रम में अगला निर्णायक कदम
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद, यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की पंक्ति में खड़ा कर सकता है जो चंद्र नमूने पृथ्वी पर लाने की क्षमता रखते हैं। MM-4 का चयन दर्शाता है कि ISRO अब जोखिम-न्यूनतम, डेटा-सिद्ध और दीर्घकालिक वैज्ञानिक लाभ वाली रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।













