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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ‘निश्छल मन’: बच्चों के बीच योगी बाबा की संवेदनशील छवि

On: March 1, 2026
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बच्चों के बीच योगी बाबा की संवेदनशील छवि
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लखनऊ, 01 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश की सियासत में सख्ती और सुशासन के लिए पहचाने जाने वाले योगी आदित्यनाथ का एक अलग ही रूप तब सामने आता है, जब वे बच्चों के बीच होते हैं। ‘निश्छल मन’ से जुड़ाव की उनकी यह शैली सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि संवेदना की वह परत है, जो संवाद के जरिए बच्चों में संस्कार और आत्मविश्वास दोनों विकसित करती है।

प्रदेश की 25 करोड़ जनता के मुख्यमंत्री, जब किसी बच्चे से सहजता से पूछते हैं – “और क्या चाहिए?”, तो राजनीति की औपचारिक दीवारें पिघल जाती हैं। यही कारण है कि बच्चे भी उन्हें ‘योगी बाबा’ कहकर अपनापन महसूस करते हैं।

‘निश्छल मन’ से संवाद: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बाल स्नेह

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों से जुड़ाव कई अवसरों पर चर्चा का विषय बना है। हाल ही में जापान दौरे के दौरान यामानाशी में भारतीय मूल के बच्चों से मुलाकात के समय एक बालक ने ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ मंत्र का उच्चारण किया। एक पंक्ति भूल जाने पर स्वयं मुख्यमंत्री ने मंत्र पूरा कर उसका आत्मविश्वास बढ़ाया।

वहीं ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः’ मंत्र के सामूहिक उच्चारण ने वहां उपस्थित परिवारों को भावुक कर दिया। विदेश की धरती पर भारतीय संस्कृति का यह जीवंत दृश्य मुख्यमंत्री के लिए भी विशेष रहा।

जनता दर्शन कार्यक्रमों में भी कई बार बच्चों की सहज अभिव्यक्ति ने माहौल को मानवीय बना दिया। किसी बच्ची का सलाम, किसी का कविता पाठ — “हम शेर बच्चे” — और मुख्यमंत्री की मुस्कान, यह सब प्रशासनिक बैठकों से अलग एक मानवीय संवाद की कहानी कहते हैं।

सुशासन के साथ संवेदना की तस्वीर

सख्त प्रशासनिक छवि के बावजूद मुख्यमंत्री का यह पक्ष अलग पहचान बनाता है। कानपुर की मूक-बधिर खुशी गुप्ता की आवाज लौटाने का मामला हो या लखनऊ की अंजना भट्ट के मकान को 24 घंटे में कब्जामुक्त कराने का निर्णय — इन घटनाओं ने यह संदेश दिया कि शासन केवल आदेशों से नहीं, बल्कि संवेदना से भी चलता है।

31 दिसंबर 2025 को अंजना भट्ट ने जनता दर्शन में अपनी शिकायत रखी थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक दिन के भीतर प्रशासन ने कार्रवाई की। इसी तरह गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफी और पुनः विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित कराना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा।

मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “चिप्स चाहिए” जैसा मासूम जवाब सुनकर मुख्यमंत्री का खिलखिलाना सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा। उत्तराखंड भ्रमण के दौरान एक बच्चे को फूल देने पर उन्होंने मुस्कुराकर कहा — “हम भी तेरे दादा लगते हैं।”

‘जनता दर्शन’ से अस्पताल तक: त्वरित निर्णय की मिसाल

जनता दर्शन में कानपुर की एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे को लेकर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने तत्काल एंबुलेंस से उसे लखनऊ के कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान भेजने के निर्देश दिए।

लखीमपुर खीरी के सरसवा गांव के शिवांशु और अजय कुमार, जिन्होंने 2018 में माता-पिता दोनों को खो दिया था, उनकी पढ़ाई आर्थिक अभाव में रुक गई थी। मुख्यमंत्री से मिलने के बाद जिला प्रशासन ने उनका स्कूल में पुनः प्रवेश कराया और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों से जुड़ाव केवल भावनात्मक तस्वीर भर नहीं है। यह प्रशासनिक निर्णयों और त्वरित कार्रवाई में भी झलकता है। ‘निश्छल मन’ से संवाद की यह शैली बच्चों में संस्कार, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास का संचार करती है।

जहां एक ओर अपराधी कानून के भय से कांपते हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चे सहजता से अपनी बात कह पाते हैं — यही संतुलन सुशासन की असली पहचान बनता है।

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