लखनऊ, 3 अप्रैल 2026। राजनीति के मंचों पर अक्सर गंभीर नजर आने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार हल्के-फुल्के अंदाज में दिखे। मौका था आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस समारोह का, जहां उन्होंने न सिर्फ संस्थान की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया, बल्कि अपने खास अंदाज में माहौल को भी जीवंत बना दिया।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए अपने सलाहकार अवनीश अवस्थी को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मजाक में कहा कि “अवनीश अवस्थी यहां इसलिए आए हैं ताकि अपनी पत्नी के सम्मान पर ताली बजा सकें और शाम की रोटी बची रहे।” मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर सभागार में ठहाके गूंज उठे, जबकि अवनीश अवस्थी ने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी।
आकाशवाणी की विरासत और बदलता दौर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकाशवाणी के ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब न स्मार्टफोन थे, न टीवी का इतना प्रसार और न ही हर घर में फोन की सुविधा। उस दौर में आकाशवाणी ही देश-दुनिया की खबरों का सबसे विश्वसनीय माध्यम था।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बचपन में उन्होंने सबसे पहली आवाज आकाशवाणी की ही सुनी थी। यह बात केवल व्यक्तिगत स्मृति नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के सामूहिक अनुभव का हिस्सा रही है।
योगी ने यह भी बताया कि आकाशवाणी ने हिंदी की विभिन्न बोलियों—भोजपुरी, अवधी, गढ़वाली और कुमाऊनी—को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि यह माध्यम सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी वाहक बना।
इतिहास के अहम पलों में आकाशवाणी की भूमिका
मुख्यमंत्री ने 1938 की उस ऐतिहासिक घटना का भी जिक्र किया, जब पहली बार आकाशवाणी लखनऊ से ‘वंदे मातरम्’ की ध्वनि प्रसारित हुई थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले 1924 के कांग्रेस अधिवेशन में इसका विरोध हुआ था, लेकिन 1937 में इसके पहले दो छंदों को स्वीकार करने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर पुनर्प्रतिष्ठा के दौरान आकाशवाणी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यह माध्यम सिर्फ सूचना का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं और जनसंवाद का सेतु भी रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ के लिए आकाशवाणी को चुनना इसकी विश्वसनीयता और प्रभाव का प्रमाण है।
सम्मान समारोह में विभूतियों का अभिनंदन
इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें साहित्य, संगीत, खेल, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े नाम शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार प्राप्त विभूतियों—विद्या बिंदु सिंह, मालिनी अवस्थी, अरुणिमा सिन्हा, प्रो. सोनिया नित्यानंद सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया।
कार्यक्रम में आकाशवाणी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि महानिदेशक राजीव जैन ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब आकाशवाणी डिजिटल युग में और अधिक प्रभावशाली रूप में उभरेगा।
हल्के पलों के बीच गंभीर संदेश
हालांकि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का मजाकिया बयान चर्चा में रहा, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश भी छिपा था—सरकारी और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रति जुड़ाव और सम्मान।
योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट किया कि तकनीक के इस दौर में भी आकाशवाणी जैसी संस्थाओं की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है, बल्कि उन्हें समय के साथ और अधिक सशक्त बनाना होगा।











