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यूपी उच्च शिक्षा कैशलेस इलाज योजना: शिक्षकों और कर्मियों को बड़ी राहत, सरकार ने जारी किए निर्देश

On: April 3, 2026
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यूपी उच्च शिक्षा कैशलेस इलाज योजना- शिक्षकों और कर्मियों को बड़ी राहत
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लखनऊ, 02 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने “यूपी उच्च शिक्षा कैशलेस इलाज योजना” को लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत अब शिक्षकों और उनके आश्रितों को बिना भुगतान के इलाज की सुविधा मिलेगी। यह कदम लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित (Self-financed) कॉलेजों और राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी भी इस योजना के दायरे में आएंगे। खास बात यह है कि इसका लाभ उनके आश्रित परिवार के सदस्य भी उठा सकेंगे—जिससे यह योजना केवल पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक सुरक्षा कवच भी बनती नजर आ रही है।

उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और निदेशालय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि योजना को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए। विभाग ने यह भी कहा है कि किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि शिक्षकों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

इस योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कांप्रिहेसिंव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा। यही एजेंसी लाभार्थियों का डेटा प्रबंधन और अस्पतालों से समन्वय सुनिश्चित करेगी।

इलाज की सुविधा केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि साचीज से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध रहेगी। उपचार के लिए निर्धारित पैकेज दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा तय मानकों के अनुरूप होंगी। इसका मतलब है कि मरीजों को पारदर्शी और तय दरों पर इलाज मिलेगा, जिससे अनावश्यक खर्च और असमंजस से बचाव होगा।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर वर्ष 30 जून तक सभी पात्र शिक्षकों और उनके आश्रितों का विवरण नामित नोडल अधिकारी के माध्यम से साचीज को भेजना अनिवार्य किया गया है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि कोई भी पात्र व्यक्ति इस सुविधा से वंचित न रहे।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक पहले से ही किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना—जैसे आयुष्मान भारत या मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना—का लाभ ले रहे हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। यह प्रावधान दोहरी लाभ व्यवस्था को रोकने के उद्देश्य से रखा गया है।

गौरतलब है कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग पहले ही इस तरह के आदेश जारी कर चुका है। अब उच्च शिक्षा क्षेत्र में इस पहल को लागू करना राज्य सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें शिक्षकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस फैसले के बाद शिक्षकों के बीच एक सकारात्मक संदेश गया है—कि सरकार न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दे रही है, बल्कि शिक्षा देने वालों के जीवन को भी सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

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