लखनऊ, 22 फरवरी 2026 (रविवार)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath चार दिवसीय आधिकारिक विदेश यात्रा पर रविवार को सिंगापुर और जापान के लिए रवाना हो गए। सीएम योगी सिंगापुर-जापान दौरा को राज्य सरकार ने निवेश, तकनीकी सहयोग और वैश्विक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम करार दिया है।
मुख्यमंत्री के साथ 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी गया है, जिसमें वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद, सचिव अमित सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी और निवेश से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार के सूत्रों का कहना है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस निवेश परिणामों की दिशा में एक रणनीतिक पहल है।
सीएम योगी सिंगापुर-जापान दौरा: निवेश और वैश्विक साझेदारी पर फोकस
22 से 24 फरवरी तक मुख्यमंत्री और उनकी टीम सिंगापुर में आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग, संस्थागत भागीदारी और क्षेत्र-विशेष निवेश (sector-specific investment) को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी।
यह यात्रा भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अनुरूप मानी जा रही है, जिसमें डिजिटलीकरण, कौशल विकास, सतत विकास (sustainable development) और उन्नत विनिर्माण (advanced manufacturing) को प्राथमिकता दी गई है।
सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में सिंगापुर से भारत को 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर का FDI प्राप्त हुआ। ऐसे में राज्य सरकार का मानना है कि इस पूंजी प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं में आकर्षित किया जा सकता है।
शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की मुलाकात सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व से प्रस्तावित है। इनमें राष्ट्रपति Tharman Shanmugaratnam, प्रधानमंत्री Lawrence Wong, विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan और मानव संसाधन मंत्री Tan See Leng शामिल हैं।
इन बैठकों में राष्ट्रीय स्तर पर तय सहयोग ढांचे को उत्तर प्रदेश में ठोस परियोजनाओं में बदलने पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, निवेश, स्किल डेवलपमेंट और शहरी अवसंरचना (urban infrastructure) के क्षेत्रों में विशेष समझौतों पर विचार हो सकता है।
वैश्विक निवेशकों से संवाद
मुख्यमंत्री प्रमुख संप्रभु और संस्थागत निवेशकों से भी संवाद करेंगे। इनमें Temasek Holdings और GIC जैसे वैश्विक निवेशक शामिल हैं।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन निवेशकों की रुचि डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और औद्योगिक पार्क जैसी परियोजनाओं में हो सकती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह दौरा उत्तर प्रदेश को केवल निवेश गंतव्य (investment destination) के रूप में नहीं, बल्कि एशिया की उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।”
जापान चरण भी महत्वपूर्ण
सिंगापुर के बाद मुख्यमंत्री का प्रतिनिधिमंडल जापान जाएगा, जहां औद्योगिक साझेदारी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सहयोग पर चर्चा होगी। जापान पहले से ही उत्तर प्रदेश में कई औद्योगिक परियोजनाओं में साझेदार रहा है, और इस यात्रा से उस सहयोग को और गति मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक और आर्थिक संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि सीएम योगी सिंगापुर-जापान दौरा केवल एक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल यूपी’ (Global UP) की रणनीति का हिस्सा है। जिस तरह राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में निवेश सम्मेलनों के जरिए बड़े एमओयू साइन किए हैं, उसी कड़ी में यह दौरा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह कूटनीतिक सक्रियता जमीन पर कितने निवेश समझौतों और रोजगार अवसरों में तब्दील होती है।
उत्तर प्रदेश की आर्थिक दिशा तय करने वाले इस दौरे से राज्य को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।









