नई दिल्ली (रविवार, 8 नवंबर 2026)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के कई इलाकों में घने स्मॉग की चादर छाई हुई है। हवा में प्रदूषक कणों की बढ़ती मात्रा के बीच लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिवाली के दिन पटाखों से निकलने वाला धुआं स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में राजधानी की हवा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 364 से 369 के बीच दर्ज किया गया। यह बहुत खराब श्रेणी में आता है। वहीं, शहर के कई प्रदूषण निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी का संकेत है।
दिल्ली AQI: कई इलाकों में 400 के पार पहुंचा प्रदूषण
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। आईआईटी दिल्ली के आसपास AQI 440 से 452 तक दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। पंजाबी बाग, जहांगीरपुरी, रोहिणी, आरके पुरम और विवेक विहार जैसे इलाकों में भी हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।
शहर के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर 400 के पार दर्ज किया गया। स्मॉग के कारण दृश्यता भी प्रभावित हो रही है। सुबह और शाम के समय सड़कों पर धुंध की मोटी परत दिखाई दे रही है। ऐसे हालात में लोगों को बाहर निकलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषक कण केवल आंखों में जलन या गले में खराश तक सीमित नहीं हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सांस और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।
दिवाली पर दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की आशंका
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार, 8 और 9 नवंबर को दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई गई है। दिवाली के पटाखों से निकलने वाला धुआं, आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं और कमजोर हवाएं प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण की समस्या हर साल विकराल रूप लेती है। इस दौरान हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियां भी हवा की गुणवत्ता पर असर डालती हैं।
दिवाली पर आतिशबाजी के बाद हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में इस बार भी राजधानी के लोगों को त्योहार के दौरान प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP लागू
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत विभिन्न प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 8 नवंबर को दिल्ली में GRAP Stage-II लागू था। इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
वहीं, निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध और कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति जैसी व्यवस्थाएं प्रदूषण की स्थिति के आधार पर लागू की जाती हैं। इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली-एनसीआर में प्रमाणित ग्रीन पटाखों को निर्धारित स्थानों पर सीमित समय के लिए जलाने की अनुमति दी गई है। इसके अनुसार, 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकते हैं। 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध बहाल होना है।
दिल्ली में प्रदूषण से बचने के लिए बरतें सावधानी
दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को प्रदूषण के अधिक संपर्क से बचना चाहिए।
प्रदूषण के दौरान कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें।
- बाहर जाते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क इस्तेमाल करें।
- घर के भीतर प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
- बच्चों और बुजुर्गों को खुले में अधिक समय तक रहने से बचाएं।
- प्रदूषण के दौरान बाहर व्यायाम या दौड़ने जैसी गतिविधियों से परहेज करें।
- सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन जहरीली हवा के बीच इसका आनंद लेना स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग उत्सव के साथ-साथ पर्यावरण और अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। राजधानी की हवा को साफ रखने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की भी है।













