नई दिल्ली/4 नवंबर 2026: दिवाली से पहले देश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का असर दिखने लगा है। ठंड की दस्तक के साथ हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जा रही है। राजधानी दिल्ली में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 269 तक पहुंच गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं मुंबई और कोलकाता में भी हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ स्तर पर बनी हुई है।
हालांकि, देश के कुछ शहरों से राहत भरी तस्वीर भी सामने आई है। चेन्नई और हैदराबाद में हवा की गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर है। बेंगलुरु में भी प्रदूषण का स्तर फिलहाल मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया है।
दिवाली के नजदीक आते ही प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पटाखों का धुआं, वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और मौसम में बदलाव कई शहरों में हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि देश के प्रमुख महानगरों में हवा का हाल क्या है और दिल्ली की स्थिति इतनी खराब क्यों बनी हुई है?
4 नवंबर को देश के प्रमुख शहरों का AQI
4 नवंबर को सामने आए वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के अनुसार, देश के छह प्रमुख शहरों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग दर्ज किया गया। दिल्ली सबसे ऊपर यानी सबसे प्रदूषित शहर के रूप में सामने आई।
| शहर | AQI | वायु गुणवत्ता श्रेणी |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 269 | खराब |
| मुंबई | 161 | मध्यम |
| कोलकाता | 155 | मध्यम |
| बेंगलुरु | 110 | मध्यम |
| चेन्नई | 81 | संतोषजनक |
| हैदराबाद | 71 | संतोषजनक |
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली की हवा अन्य प्रमुख महानगरों की तुलना में अधिक प्रदूषित है। मुंबई और कोलकाता में भी प्रदूषण का स्तर संतोषजनक सीमा से ऊपर है, जबकि दक्षिण भारत के कुछ शहरों में अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता दर्ज की गई है।
दिल्ली में दिवाली से पहले प्रदूषण क्यों बढ़ रहा है?
दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का बढ़ना हर साल एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस बार भी हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। राजधानी का AQI 269 दर्ज किया गया है, जो खराब श्रेणी में आता है।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण स्थलों की धूल और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा को प्रभावित करता है।
सर्दियों में हवा की गति कम होने और वातावरण में तापमान संबंधी परतें बनने से प्रदूषक जमीन के नजदीक जमा हो सकते हैं। इससे प्रदूषण का असर ज्यादा महसूस होता है।
दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, प्रदूषण की वास्तविक स्थिति मौसम, स्थानीय उत्सर्जन और हवा की दिशा पर निर्भर करती है।
मुंबई और कोलकाता में हवा का क्या है हाल?
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में AQI 161 दर्ज किया गया है। यह मध्यम श्रेणी में आता है। वहीं कोलकाता का AQI 155 रहा। दोनों शहरों में हवा की गुणवत्ता दिल्ली से बेहतर जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह साफ नहीं कहा जा सकता।
मुंबई में वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां और औद्योगिक प्रदूषण वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। समुद्री हवाओं के कारण कई बार प्रदूषकों के फैलाव में मदद मिलती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि शहर प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षित है।
कोलकाता में भी शहरी उत्सर्जन और मौसम की परिस्थितियां हवा की गुणवत्ता पर असर डाल सकती हैं। दिवाली के आसपास पटाखों का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण में अतिरिक्त इजाफा होने की आशंका रहती है।
चेन्नई और हैदराबाद में मिली राहत, बेंगलुरु की हवा मध्यम
देश के दक्षिणी हिस्से के प्रमुख शहरों में फिलहाल वायु गुणवत्ता की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दे रही है।
चेन्नई में AQI 81 और हैदराबाद में 71 दर्ज किया गया है। दोनों शहर संतोषजनक श्रेणी में हैं। वहीं बेंगलुरु का AQI 110 रहा, जो मध्यम श्रेणी में आता है।
हालांकि, इन शहरों में भी वायु गुणवत्ता के आंकड़े दिनभर बदल सकते हैं। स्थानीय यातायात, मौसम और प्रदूषण के स्रोतों के आधार पर स्थिति में उतार-चढ़ाव संभव है।
AQI क्या होता है? आसान भाषा में समझें
एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक ऐसा पैमाना है, जो हवा में प्रदूषण के स्तर और उससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को समझने में मदद करता है।
भारत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के तहत AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है।
| श्रेणी | AQI रेंज |
|---|---|
| अच्छा | 0-50 |
| संतोषजनक | 51-100 |
| मध्यम | 101-200 |
| खराब | 201-300 |
| बहुत खराब | 301-400 |
| गंभीर | 401-500 |
AQI की गणना हवा में मौजूद कई प्रदूषकों के आधार पर की जाती है। इनमें PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषक शामिल हैं।
AQI का स्तर जितना अधिक होता है, वायु प्रदूषण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका उतनी ही बढ़ जाती है।
PM2.5 और PM10 क्या हैं? क्यों खतरनाक है इनका बढ़ना?
वायु प्रदूषण की चर्चा में PM2.5 और PM10 का नाम अक्सर सामने आता है। ये हवा में मौजूद बेहद छोटे कण होते हैं, जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है।
PM2.5: ऐसे सूक्ष्म कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं। कुछ कण रक्तप्रवाह तक भी पहुंच सकते हैं।
PM10: ऐसे कण जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये सांस के जरिए श्वसन तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं और स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं।
PM2.5 का बढ़ा हुआ स्तर विशेष रूप से चिंता का विषय है। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। पहले से अस्थमा, फेफड़ों या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए प्रदूषित हवा ज्यादा जोखिम पैदा कर सकती है।
दिवाली से पहले किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
वायु प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को इसके कारण अधिक परेशानी हो सकती है।
- अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग।
- बच्चे, जिनका श्वसन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है।
- बुजुर्ग और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति।
- ऐसे लोग जो लंबे समय तक बाहर काम करते हैं।
- अधिक शारीरिक मेहनत या खुले में व्यायाम करने वाले लोग।
जब AQI खराब श्रेणी में पहुंच जाए, तो बाहर लंबे समय तक रहने और भारी शारीरिक गतिविधियों से बचना बेहतर हो सकता है। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्वास्थ्य सलाह का पालन करना चाहिए।
प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?
दिवाली से पहले और त्योहार के दौरान वायु प्रदूषण से बचाव के लिए कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।
- अपने शहर का AQI नियमित रूप से जांचें।
- प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियां सीमित रखें।
- सड़क किनारे और अधिक यातायात वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक रहने से बचें।
- घर के भीतर धूम्रपान और अन्य धुएं के स्रोतों से दूरी रखें।
- जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला, सही फिटिंग का N95 मास्क इस्तेमाल करें।
- अस्थमा या अन्य बीमारी से पीड़ित लोग अपनी निर्धारित दवाएं और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
- सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सहायता लें।
दिनभर बदल सकता है AQI, आंकड़ों को लेकर रखें ध्यान
वायु गुणवत्ता के आंकड़े स्थिर नहीं रहते। हवा की गति, तापमान, मौसम, प्रदूषण के स्रोत और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर AQI में बदलाव हो सकता है।
इसके अलावा अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर दर्ज आंकड़ों में भी अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए किसी शहर की समग्र स्थिति समझने के लिए स्थानीय निगरानी केंद्रों और आधिकारिक वायु गुणवत्ता रिपोर्ट पर नजर रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
दिवाली से पहले देश के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर चिंता बढ़ा रहा है। दिल्ली का AQI 269 के साथ खराब श्रेणी में पहुंच गया है, जबकि मुंबई और कोलकाता में हवा मध्यम स्तर पर बनी हुई है। चेन्नई और हैदराबाद में फिलहाल कुछ राहत जरूर है।
त्योहार की खुशियां जरूरी हैं, लेकिन साफ हवा और सेहत की कीमत पर नहीं। प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ आम लोगों की जिम्मेदारी भी अहम है। दिवाली पर पटाखों का कम इस्तेमाल, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नियंत्रण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां हवा को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
ध्यान दें: AQI के आंकड़े समय और मॉनिटरिंग स्टेशन के अनुसार बदल सकते हैं। यहां दिए गए आंकड़े 4 नवंबर 2026 के उपलब्ध विवरण पर आधारित हैं।













