लखनऊ | 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार): अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैदिक विद्वान डॉ. डेविड फ्रॉले ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात महज़ एक औपचारिक संवाद नहीं थी, बल्कि इसमें योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति जैसे विषयों पर गंभीर और बहुआयामी विमर्श देखने को मिला।
अमेरिका के विसकॉन्सिन राज्य में एक कैथोलिक परिवार में जन्मे डॉ. डेविड फ्रॉले आज वैश्विक स्तर पर वैदिक दर्शन और हिंदू चिंतन के प्रमुख प्रवक्ताओं के रूप में पहचाने जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने न केवल उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण की सराहना की, बल्कि उनके नेतृत्व को समकालीन राजनीति में एक सकारात्मक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में भी रेखांकित किया।
डॉ. फ्रॉले ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली राजनीति में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में एक ठोस प्रयास है। उनके अनुसार, “योगी आदित्यनाथ केवल प्रशासन नहीं चला रहे, बल्कि भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को आधुनिक शासन प्रणाली में समाहित कर राजनीति का शुद्धिकरण कर रहे हैं।” उन्होंने नाथ संप्रदाय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा वैश्विक कल्याण की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देने की क्षमता रखती है।
मुलाकात के दौरान अयोध्या में हो रहे व्यापक विकास कार्यों का भी उल्लेख हुआ। डॉ. डेविड फ्रॉले ने ‘नई अयोध्या’ के कायाकल्प की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास भारत को उसकी वैदिक जड़ों से पुनः जोड़ने का माध्यम बन रहा है। उनके शब्दों में, अयोध्या का पुनर्निर्माण केवल एक शहर का विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज जब विश्व तेजी से अपनी आध्यात्मिक दिशा से भटक रहा है, ऐसे समय में वेद, योग और आयुर्वेद जैसी भारतीय ज्ञान परंपराओं का पुनर्जीवन अत्यंत आवश्यक हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
डॉ. फ्रॉले ने भगवान श्रीराम को भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बताते हुए कहा कि राम भारतीय सभ्यता के उस सूत्रधार हैं, जो विविध धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को एकता के धागे में पिरोते हैं। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व में ‘आदित्य तत्व’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सूर्य ऊर्जा और आत्मविद्या के प्रतीक हैं, और योग की मूल चेतना भी इसी से जुड़ी हुई है।
गौरतलब है कि डॉ. डेविड फ्रॉले ने पिछले कई दशकों में वेद, हिंदू धर्म, योग, आयुर्वेद और ज्योतिष जैसे विषयों पर व्यापक अध्ययन किया है और अनेक पुस्तकें भी लिखी हैं। उनके इस योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था। इसी वर्ष मुंबई स्थित साउथ इंडियन एजुकेशन सोसायटी द्वारा उन्हें आयुर्वेद, योग और वैदिक ज्योतिष के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘नेशनल एमिनेंस अवार्ड’ भी प्रदान किया गया।








