गोरखपुर, Thu, 04 Dec 2025। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन सिर्फ़ एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि शिक्षा की मूल आत्मा पर गंभीर चिंतन भी था। उन्होंने साफ़ कहा—“यदि समाज में कोई व्यक्ति अयोग्य है, तो इसका अर्थ है कि शिक्षण संस्थाओं ने अपनी Education Responsibility पूरी तरह नहीं निभाई।”
सीएम का यह बयान न केवल शिक्षा जगत के लिए चुनौती जैसा लगा, बल्कि आने वाले भारत की रूपरेखा भी तय करता दिखा।
Education Responsibility और 2047 का भेदभाव-मुक्त भारत
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीएम योगी ने स्मरण कराया कि शिक्षा परिषद अपने 100 वर्ष पूरे करने से सिर्फ़ छह वर्ष दूर है—और यह समय आत्ममंथन का है।
उन्होंने कहा कि आत्ममंथन का अर्थ केवल व्यक्तिगत विकास नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि एक संस्था ने राष्ट्र और समाज के लिए क्या योगदान दिया?
योगी ने महंत दिग्विजयनाथ द्वारा 1932 में स्थापित इस शिक्षा परिषद को “राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला” बताया। आज परिषद की 50 से अधिक संस्थाएँ देश को समर्पित नागरिक तैयार कर रही हैं। इसी कड़ी में दो पत्रिकाओं—‘दिग्विजयम’ और मिशन ‘मंझरिया’—का विमोचन किया गया, जो शोध, शिक्षा और ग्रामीण जिम्मेदारियों पर केंद्रित हैं।
सीएम का संदेश स्पष्ट था—
“अयोग्यता व्यक्ति की नहीं, व्यवस्था की विफलता होती है। यदि कोई अयोग्य है तो समझिए कहीं न कहीं शिक्षण संस्थाओं ने Education Responsibility पूरी क्षमता से नहीं निभाई।”
पंच प्रण: 2047 के विकसित भारत की नींव
योगी आदित्यनाथ ने भारत के भविष्य की दिशा को प्रधानमंत्री मोदी के “पंच प्रण” से जोड़ा। उन्होंने पाँचों प्रण को सरल लेकिन राष्ट्र-निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
1️⃣ विरासत पर गर्व
उन्होंने कहा कि हमारी पहचान हमारे महापुरुषों, संस्कृति और परंपरा में रची-बसी है।
महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, बिस्मिल और गुरु गोविंद सिंह जैसे नायक—“वह धरोहर हैं, जिन पर देश को गर्व होना चाहिए।”
2️⃣ गुलामी के अवशेषों को समाप्त करना
सीएम ने ऐतिहासिक आर्थिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि
- 2000 वर्ष पूर्व भारत विश्व अर्थव्यवस्था का 46% था,
- 400 वर्ष पहले 26%,
- और आज़ादी के समय यह घटकर 1.5% रह गया।
विदेशी शक्तियों ने भारत से 32–35 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति लूटी—जिसका असर आज भी मानसिकता में दिखाई देता है।
उन्होंने चेताया कि “भारत की उपलब्धियों को कम आँकना भी एक तरह की गुलामी है।”
3️⃣ सैनिकों के प्रति सम्मान
योगी ने कहा कि जो वर्दी में देश की रक्षा करते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता हर नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा,
“पड़ोस में आग लगे और हम खामोश बैठे रहें, तो वह आग एक दिन हमारे घर तक भी पहुँचती है।”
4️⃣ सामाजिक भेदभाव समाप्त करना
सीएम ने विभाजन की मानसिकता को भारत की सबसे बड़ी बाधा बताया।
जाति, भाषा, क्षेत्र—इन खाइयों को भरना ही चौथा प्रण है।
5️⃣ नागरिक कर्तव्यों का पालन
उन्होंने कहा,
“कानून अगर दूसरों के लिए है, तो मेरे लिए भी होना चाहिए।”
एक शिक्षक की जिम्मेदारी छात्र का सर्वांगीण विकास, व्यापारी की ईमानदारी, और जनप्रतिनिधि की जनता के प्रति निष्ठा—यही विकसित भारत की आधारशिला है।
प्रतिभागिता ही जीत है: योगेंद्र डिमरी का प्रेरक संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि
“प्रतियोगिता की असली जीत भागीदारी में है। जीत या हार कुछ समय की होती है, लेकिन भाग लेने का साहस जीवनभर प्रेरित करता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, ईमानदारी, तकनीकी समझ और चरित्र निर्माण पर ध्यान देने की सलाह दी।
डिमरी ने कहा—
“असफलता किसी बाधा का अंत नहीं, बल्कि उत्कृष्टता की ओर पहला कदम है।”
शोभायात्रा में दिखी शिक्षा परिषद की झलक
समारोह के अंत में परिषद से जुड़े विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भव्य शोभायात्रा निकाली, जिसमें सांस्कृतिक झाँकियाँ, पारंपरिक परिधान और युवा ऊर्जा का अनूठा मिश्रण दिखाई दिया। कार्यक्रम का माहौल संदेश दे रहा था कि यदि शिक्षण संस्थाएँ अपनी Education Responsibility पूरे मन से निभाएँ, तो 2047 का भारत निश्चित ही भेदभाव-रहित, सक्षम और विकसित होगा।












