नई दिल्ली|02 जून 2026: मानसून के आगमन से पहले केंद्र सरकार एल नीनो के संभावित प्रभावों को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस बार मौसम संबंधी चुनौतियों का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी की जाएगी। यही वजह है कि फसल प्रबंधन, जल संरक्षण, बीज उपलब्धता और किसानों तक समय पर वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने को प्राथमिकता दी जा रही है।
मंगलवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों के साथ मानसून और कृषि तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, मौसम की लगातार निगरानी और संभावित जोखिमों से निपटने की रणनीति पर विशेष चर्चा हुई।
एल नीनो के खतरे के बीच खरीफ फसलों पर सरकार की नजर
सरकार का मानना है कि यदि एल नीनो का प्रभाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलें देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती हैं और इनकी बुवाई काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एल नीनो केवल बारिश की मात्रा को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि वर्षा के समय और उसके भौगोलिक वितरण में भी असंतुलन पैदा कर सकता है। यही कारण है कि इस बार सरकार कुल वर्षा के आंकड़ों से आगे बढ़कर जिलावार मौसम की स्थिति पर भी विशेष नजर रखने की तैयारी कर रही है।
सामान्य से 90 प्रतिशत मानसून का अनुमान, फिर भी सतर्कता बरकरार
भारतीय मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून सामान्य का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हालांकि कृषि क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में आज भी सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं। देश के करीब आधे कृषि क्षेत्र में किसान सीधे वर्षा पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बारिश में थोड़ी भी अनिश्चितता खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।
इसी परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि योजनाएं तैयार करने की सलाह दे रही है। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल किस्मों को बढ़ावा देने और किसानों तक समय पर तकनीकी जानकारी पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
केवल बारिश का इंतजार नहीं, वैकल्पिक योजना भी तैयार
समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार की रणनीति सिर्फ मानसून पर निर्भर रहने की नहीं है। यदि कुछ क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से कम रहती है तो वहां वैकल्पिक फसल योजना और संसाधनों की व्यवस्था पहले से तैयार रहनी चाहिए।
इसके तहत राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बीज भंडारण, फसल विविधीकरण और कृषि सलाह सेवाओं को मजबूत करें। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों और स्थानीय कृषि विभागों के माध्यम से किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जाए ताकि बदलती मौसम परिस्थितियों में नुकसान को कम किया जा सके।
जल संरक्षण बना सरकार की प्रमुख रणनीति
बैठक में जल संरक्षण को भी महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में शामिल किया गया। तालाबों, बांधों, जलाशयों और अन्य जल संरचनाओं में उपलब्ध पानी के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो पहले से संरक्षित जल कृषि गतिविधियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
राहत की बात यह है कि देश के प्रमुख जलाशयों में इस समय पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक पानी उपलब्ध है। इससे सिंचाई और पेयजल प्रबंधन को लेकर सरकार को कुछ हद तक मजबूती मिली है।
किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने पर विशेष फोकस
सरकार की प्राथमिकता केवल मौसम की निगरानी तक सीमित नहीं है। कृषि मंत्रालय चाहता है कि बदलते मौसम के बीच किसानों को समय पर सही सलाह मिले, ताकि वे फसल चयन, बुवाई और सिंचाई से जुड़े निर्णय बेहतर ढंग से ले सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जानकारी, बेहतर बीज और जल प्रबंधन की रणनीति अपनाकर एल नीनो जैसे मौसमीय जोखिमों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।












