नई दिल्ली/10 अक्टूबर 2026। टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम को लेकर भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने अपना रुख स्पष्ट किया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में ऑलराउंडर शिवम दुबे को चौथे नंबर पर भेजने के फैसले का बचाव करते हुए गंभीर ने कहा कि इस प्रारूप में केवल ओपनर्स की जगह तय होती है, जबकि बाकी बल्लेबाजों को परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग क्रम पर उतारा जा सकता है।
दुबे को शानदार फॉर्म में चल रहे श्रेयस अय्यर से पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था। हालांकि, वह बड़ी पारी नहीं खेल सके और 10 गेंदों पर सात रन बनाकर आउट हो गए। भारतीय टीम ने पांच विकेट पर 249 रन बनाए, लेकिन वेस्टइंडीज ने 18.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर मुकाबला जीत लिया।
गौतम गंभीर ने शिवम दुबे को नंबर-4 पर भेजने का क्यों किया बचाव?
गौतम गंभीर ने कहा कि शिवम दुबे का ऊपरी क्रम में इस्तेमाल करना कोई नया प्रयोग नहीं है। भारतीय टीम विश्व कप और उससे पहले भी उन्हें इस तरह बल्लेबाजी के लिए भेज चुकी है।
गंभीर के मुताबिक, टीम प्रबंधन बल्लेबाजी क्रम को लेकर लंबे समय से लचीला रवैया अपनाता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी खिलाड़ी को एक निश्चित स्थान पर बांधकर रखने के बजाय मैच की परिस्थितियों और टीम की जरूरत के अनुसार फैसले लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर फैसला सफल नहीं होता। कभी रणनीति काम करती है, तो कभी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते। दुबे इससे पहले चौथे नंबर पर अच्छी बल्लेबाजी कर चुके हैं, इसलिए उन्हें इस क्रम पर भेजना टीम की रणनीति का हिस्सा था।
टी20 क्रिकेट में सिर्फ ओपनर्स की जगह पक्की
गंभीर ने टी20 प्रारूप में अपनी बल्लेबाजी नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि टीम का दृष्टिकोण आगे भी लचीला रहेगा। उनके मुताबिक, इस प्रारूप में केवल शुरुआती बल्लेबाजों की जगह स्थायी होती है, जबकि अन्य खिलाड़ियों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्रम पर उतारा जा सकता है।
इस रणनीति का उद्देश्य विपक्षी टीम की गेंदबाजी, मैच की स्थिति और उपलब्ध बल्लेबाजी विकल्पों के हिसाब से सही संयोजन तैयार करना है।
शिवम दुबे जैसे ऑलराउंडर का ऊपरी क्रम में इस्तेमाल करने से टीम को आक्रामक बल्लेबाजी का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, इस मुकाबले में दुबे बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और भारतीय टीम को बीच के ओवरों में अपेक्षित गति हासिल करने में मुश्किल हुई।
249 रन बनाने के बावजूद भारत को मिली हार
भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच विकेट पर 249 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इसके बावजूद वेस्टइंडीज ने 18.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया।
भारतीय पारी के दौरान बीच के ओवरों में रन बनाने की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। बाद में श्रेयस अय्यर और तिलक वर्मा ने रन गति बढ़ाने में योगदान दिया और टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया।
लेकिन क्रिकेट में केवल बड़ा स्कोर खड़ा करना ही काफी नहीं होता। विपक्षी टीम की बल्लेबाजी रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस मुकाबले में भारतीय गेंदबाज लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके।
ओस और सपाट पिच पर गेंदबाजी को लेकर गंभीर की चिंता
मैच के बाद गंभीर ने ओस से प्रभावित सपाट पिचों पर गेंदबाजी की चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाजों के लिए रन रोकना मुश्किल हो जाता है, लेकिन टीम को इसका समाधान खोजना होगा।
गंभीर ने हार को हल्के में लेने से इनकार करते हुए कहा कि अगर टीम लगातार सुधार करना चाहती है, तो उसे अपनी कमियों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व चैंपियन होने के नाते भारतीय टीम को अपने प्रदर्शन में निरंतर सुधार करते रहना चाहिए।
भारतीय टीम के सामने आगे की चुनौती
दूसरे टी20 मुकाबले से भारतीय टीम के सामने दो अहम पहलू उभरकर आए। पहला, बल्लेबाजी क्रम में लचीलापन बनाए रखते हुए खिलाड़ियों की भूमिका स्पष्ट करना और दूसरा, बड़े स्कोर का बचाव करने के लिए गेंदबाजी में बेहतर रणनीति तैयार करना।
गौतम गंभीर ने बल्लेबाजी क्रम में प्रयोग जारी रखने का संकेत दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले मुकाबलों में टीम प्रबंधन शिवम दुबे और अन्य खिलाड़ियों का इस्तेमाल किस क्रम पर करता है और गेंदबाज ओस वाली परिस्थितियों में विपक्षी बल्लेबाजों को रोकने के लिए किस तरह की योजना अपनाते हैं।













