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गुरु गोरखनाथ दर्शन: टाटा संस चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने सीएम योगी के साथ किया पूजन, गोरक्षपीठ में किया भोजन

On: April 15, 2026
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टाटा संस चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने सीएम योगी के साथ किया पूजन
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गोरखपुर, 15 अप्रैल 2026। कभी-कभी खबरें सिर्फ घटनाओं का विवरण नहीं होतीं, वे उस भाव को भी पकड़ती हैं जो समाज की गहराइयों में बहता है। बुधवार को गोरखपुर में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गुरु गोरखनाथ दर्शन किए।

यह सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं थी—यह परंपरा, आस्था और आधुनिक उद्योग जगत के बीच एक सहज संवाद जैसा लगा।

गोरखनाथ मंदिर में वैदिक विधि से पूजन

गोरखनाथ मंदिर पहुंचने पर दोनों नेताओं ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा सम्पन्न हुई।

मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने इस अवसर पर चंद्रशेखरन को ‘शिवगोरक्ष’ नामांकित अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट किया। मंदिर परिसर में उस समय एक आध्यात्मिक शांति थी—जिसमें औपचारिकता से ज्यादा श्रद्धा का भाव दिखा।

सीएम योगी ने कराया मंदिर और नाथपंथ का परिचय

दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं गोरक्षपीठाधीश्वर भी हैं, ने चंद्रशेखरन को मंदिर परिसर का विस्तृत भ्रमण कराया।

इस दौरान उन्होंने नाथपंथ की परंपरा, उसके इतिहास, और महायोगी गुरु गोरखनाथ के जीवन-दर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बातचीत में सिर्फ धार्मिक पहलू ही नहीं, बल्कि नाथपंथ के सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक प्रभाव पर भी चर्चा हुई।

यह पल कुछ ऐसा था, जहां एक ओर आध्यात्मिक विरासत थी और दूसरी ओर आधुनिक कॉर्पोरेट नेतृत्व—दोनों एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते दिखे।

गोरक्षपीठ में दोपहर भोज, सादगी का अनुभव

मंदिर भ्रमण के बाद चंद्रशेखरन ने गोरक्षपीठ की ओर से आयोजित दोपहर भोज में भी हिस्सा लिया। यह भोज केवल औपचारिक आतिथ्य नहीं था, बल्कि भारतीय परंपरा की उस सादगी का अनुभव था, जिसमें अतिथि को सम्मान के साथ भोजन कराया जाता है।

टेक्नोलॉजी से आध्यात्म तक की यात्रा

दरअसल, चंद्रशेखरन गोरखपुर में महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्थापित पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लोकार्पण के लिए आए थे।

एक ही दिन में टेक्नोलॉजी और आध्यात्म—दोनों का यह संगम अपने आप में खास रहा। यह दिखाता है कि आधुनिक विकास और सांस्कृतिक जड़ें, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

निष्कर्ष: संतुलन की एक झलक

गुरु गोरखनाथ दर्शन की यह यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह उस संतुलन की झलक भी थी, जिसे आज का भारत साधने की कोशिश कर रहा है—जहां विकास की रफ्तार और परंपरा की गहराई, दोनों एक साथ आगे बढ़ें।

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