कर्नाटक (वेमगल) मंगलवार, 17 फरवरी 2026: आज भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता से जुड़ा एक बड़ा अध्याय जुड़ गया, जब H-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह पहल भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन विशेष रूप से मौजूद रहीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वर्चुअल माध्यम से इसका शुभारंभ किया।
समारोह के दौरान माहौल सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की औद्योगिक सोच का संकेत देता दिखा। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की मौजूदगी ने इस परियोजना के सामरिक महत्व को और स्पष्ट कर दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने माना कि लंबे समय तक रक्षा उत्पादन सरकारी क्षेत्र तक सीमित रहा, लेकिन अब निजी उद्योग और MSME की भागीदारी ने पूरी तस्वीर बदल दी है।
रक्षा निर्यात में नई उड़ान
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के रक्षा निर्यात में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और देश अब दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों की कतार में खड़ा है। उनका कहना था कि इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ छोटे और मध्यम उद्योगों को मिला है। आज कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने उपकरणों के पार्ट्स और कंपोनेंट्स भारतीय MSME से खरीद रही हैं, जो भारत की तकनीकी दक्षता और भरोसे का प्रमाण है।
उन्होंने विदेशी कंपनियों से अपील की कि वे भारत के साथ तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करें। उनके मुताबिक, भारत न केवल अपने लिए बल्कि मित्र देशों की सुरक्षा जरूरतों के लिए भी उन्नत समाधान देने को तैयार है। यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की दिशा में व्यावहारिक कदम बढ़ा रहा है।
1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश, युवाओं को रोजगार
H-125 हेलीकॉप्टर कार्यक्रम में 1000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की जानकारी साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परियोजना हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी। वेमगल में स्थापित यह फाइनल असेंबली लाइन भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण के क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की उच्च तकनीकी परियोजनाएं केवल रोजगार ही नहीं देतीं, बल्कि स्थानीय उद्योगों की तकनीकी क्षमता भी बढ़ाती हैं। स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होने से आने वाले समय में भारत के रक्षा निर्माण खर्च में भी संतुलन देखने को मिल सकता है।
‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को गति
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे राष्ट्रीय अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 के बाद से भारत ने रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार किए हैं। रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर, निवेश प्रोत्साहन और निजी क्षेत्र को अवसर देने जैसी नीतियों ने इस बदलाव को संभव बनाया है।
उन्होंने बताया कि अब निजी क्षेत्र का योगदान कुल रक्षा उत्पादन का लगभग एक चौथाई तक पहुंच चुका है, जो इस क्षेत्र में बदलती सोच का स्पष्ट संकेत है। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत उच्च गुणवत्ता वाले सैन्य उपकरणों के निर्माण और निर्यात में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा।
वैश्विक साझेदारी की नई मिसाल
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस हेलीकॉप्टर्स के संयुक्त प्रयास से तैयार यह परियोजना भारत-फ्रांस रणनीतिक संबंधों की भी नई पहचान बन रही है। कार्यक्रम के दौरान दोनों टीमों की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने इसे मित्र देशों के साथ उच्च तकनीकी सहयोग का सफल उदाहरण बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि H-125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता व्यावहारिक कदम है — जहां तकनीक, रोजगार और वैश्विक साझेदारी एक साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं।












