शिमला (15 फरवरी 2026): हिमाचल विधानसभा बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विधानसभा सचिवालय को विधायकों की ओर से 100 से अधिक प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिन्हें संबंधित विभागों को जवाब तैयार करने के लिए भेज दिया गया है। इससे साफ है कि इस बार सत्र के दौरान आर्थिक मुद्दों से लेकर क्षेत्रीय समस्याओं तक कई अहम विषयों पर गहन चर्चा देखने को मिल सकती है।
विधानसभा का पहला चरण 16 फरवरी को दोपहर दो बजे शुरू होगा। सत्र की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषण से होगी, जिसके बाद सदन में शासकीय और विधायी कार्य आगे बढ़ेंगे। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रखने की अपील करने का फैसला किया है। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बजट सत्र अक्सर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का मंच बन जाता है।
पहले चरण में क्या-क्या रहेगा अहम
विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अस्थायी सूची के अनुसार सत्र फिलहाल 16 से 18 फरवरी तक चलेगा। पहले दिन यदि कोई शोकोद्गार होगा तो उस पर वक्तव्य दिए जाएंगे, जिसके बाद विधायी प्रक्रिया शुरू होगी। जानकारी के मुताबिक राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही राजस्व घाटा अनुदान बंद होने का मुद्दा भी सदन में जोर पकड़ सकता है।
इस बार विधायकों के सवालों में प्रदेश की आर्थिक स्थिति, सेब पर आयात शुल्क घटाने का मुद्दा, कानून-व्यवस्था, अवैध खनन और विकास कार्यों से जुड़े स्थानीय विषय प्रमुख हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बजट सत्र में आर्थिक चुनौतियां और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
कांग्रेस और भाजपा की रणनीति बैठकें भी अहम
सत्र के पहले ही दिन यानी 16 फरवरी की सुबह कांग्रेस और भाजपा दोनों विधायक दल अपनी-अपनी रणनीति बैठकें करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सरकार विपक्ष के संभावित सवालों का जवाब देने की रणनीति तैयार करेगी। खासकर राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर पार्टी आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है।
दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की बैठक विधानसभा परिसर में सुबह 11 बजे होगी। इसमें सरकार को आर्थिक स्थिति, कानून-व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर घेरने की रणनीति तय की जाएगी।
राजनीतिक संदेश और जनता की उम्मीदें
हर बजट सत्र केवल आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह सरकार की प्राथमिकताओं और विपक्ष की जवाबदेही तय करने का मंच भी बनता है। इस बार 100 से अधिक सवालों का आना संकेत देता है कि विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सक्रिय हैं। जनता की नजरें भी अब इस बात पर टिकी हैं कि सत्र के दौरान उठने वाले मुद्दे कितनी मजबूती से समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं।













