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हिंदी और स्थानीय भाषाएं एक ही मां की दो बहनें, इनमें कोई टकराव नहीं: अगरतला में बोले अमित शाह

On: February 20, 2026
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हिंदी और स्थानीय भाषाएं एक ही मां की दो बहनें
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अगरतला, 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार): पूर्वोत्तर भारत के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में भाषाई समन्वय को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाएं किसी भी रूप में प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, बल्कि ये “एक ही मां की दो बहनें” हैं। यानी दोनों का अस्तित्व परस्पर जुड़ा हुआ है और एक के विकास से दूसरी को भी मजबूती मिलती है।

अगरतला के हापनिया स्थित इंटरनेशनल फेयर कॉम्प्लेक्स में आयोजित पूर्वी, पूर्वोत्तर और उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए शाह ने भाषाई विविधता को भारत की असली ताकत बताया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और राजभाषा विभाग से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि हिंदी के विस्तार से क्षेत्रीय भाषाओं पर दबाव पड़ता है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। उनके अनुसार, जब हिंदी और स्थानीय भाषाएं साथ-साथ आगे बढ़ती हैं, तब देश की भाषाई विरासत और अधिक समृद्ध होती है। उन्होंने हिंदी को सभी भारतीय भाषाओं की “सहेली” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी भाषा को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि संवाद और सहभागिता को मजबूत बनाना है।

अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर एक सकारात्मक माहौल बना है। नई शिक्षा नीति समेत कई नीतिगत फैसलों ने भारतीय भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान के प्रसार को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि भारत तभी वास्तविक रूप से आत्मनिर्भर बन सकता है, जब उसकी भाषाएं भी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

इस दौरान सम्मेलन में राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और हिंदी और स्थानीय भाषाएं दोनों के संतुलित विकास के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने प्रशासनिक कार्यों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ाने और तकनीकी माध्यमों के जरिए इनके उपयोग को सरल बनाने के सुझाव भी साझा किए।

त्रिपुरा पहुंचने से पहले गृह मंत्री ने असम के सिलचर में एक जनसभा को भी संबोधित किया। वहां उन्होंने राज्य में बीते वर्षों में हुए बुनियादी ढांचा विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने विकास कार्यों में नई गति दी है। शाह के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में असम में औसतन प्रतिदिन 14 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है। इसके साथ ही सैकड़ों पुलों का निर्माण पूरा किया गया और चार प्रमुख नए पुलों का उद्घाटन भी किया गया है।

उन्होंने कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए कहा कि जो कार्य दशकों तक लंबित रहे, उन्हें मौजूदा सरकार ने सीमित समय में पूरा कर दिखाया है। शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अब विकास के नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है, जहां बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

भाषा के सवाल पर अपनी बात समाप्त करते हुए गृह मंत्री ने दोहराया कि भारत की भाषाई विविधता ही उसकी असली पहचान है और हिंदी और स्थानीय भाषाएं मिलकर इस पहचान को और अधिक सशक्त बनाती हैं।

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