गोरखपुर, Thu, 04 Dec 2025। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर India Vision 2047 की रूपरेखा सामने रखी। उनका संदेश केवल एक राजनीतिक घोषणापत्र जैसा नहीं था, बल्कि आने वाले भारत की सामाजिक-आर्थिक दिशा का जीवंत खाका भी था। योगी ने कहा कि 2047 में जब देश आज़ादी का शताब्दी वर्ष मनाएगा, तब भारत का लक्ष्य सिर्फ़ आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि विकसित राष्ट्रों की प्रथम कतार में खड़े होना है। उनके शब्दों में एक तरह का आत्मविश्वास झलक रहा था—एक ऐसा भरोसा, जो नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।
कार्यक्रम का शुभारंभ एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने सीएम योगी की मौजूदगी में किया। समारोह का माहौल पारंपरिक गंभीरता के साथ-साथ एक आधुनिक भारत की आकांक्षा को भी प्रतिबिंबित कर रहा था।
India Vision 2047 और पीएम मोदी का पंच प्रण
सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज़ादी के अमृत महोत्सव के दौरान दिए गए पंच प्रण को “शाश्वत मंत्र” बताया। उनके अनुसार, भारत के विकसित होने की नींव तभी मजबूत होगी जब नागरिक इन पाँच संकल्पों को जीवन में उतारेंगे।
1️⃣ विरासत पर गर्व – अपनी जड़ों की ओर लौटना
योगी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी विरासत से होती है। उन्होंने महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाकउल्ला खां जैसे वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही परंपरा है, जो भारत को आत्मगौरव देती है।
अयोध्या में बन रहा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर इस विरासत की स्वर्णिम कड़ी है।
2️⃣ गुलामी के अवशेष मिटाना – आत्मसम्मान का संकल्प
मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक आर्थिक आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कभी भारत विश्व अर्थव्यवस्था का 46% हिस्सा था, लेकिन विदेशी शासन ने देश को लूटकर 1.5% पर पहुँचा दिया।
उन्होंने कहा, “जिन्होंने भारत को करीब 32–35 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान पहुँचाया, उनके साए आज भी हमारे भीतर मौजूद हैं। इन्हीं अवशेषों को मिटाने से भारत फिर से अपनी क्षमता पहचान रहा है।”
भारत के 4 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ते कदम और वैश्विक सर्वे में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की पहचान उन्होंने इसी संकल्प का परिणाम बताया।
3️⃣ सैन्य बलों का सम्मान – सुरक्षा का स्तंभ
योगी ने कहा कि यूनिफॉर्म धारी हर बल—सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस—के त्याग को सम्मान देना नागरिक-कर्तव्य है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान जितना बढ़ेगा, राष्ट्र उतना ही मजबूत होगा।
4️⃣ सामाजिक एकता – विभाजन से विकास नहीं होता
सीएम ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि विदेशी आक्रांता इसलिए सफल हुए क्योंकि हम जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर बंटे हुए थे।
उन्होंने एक मार्मिक उदाहरण दिया:
“पड़ोस में आग लगी हो और हम चैन से बैठे रहें, तो देर-सवेर आग हमारे घर तक भी आएगी।”
उनका संदेश स्पष्ट था—राष्ट्रीय पहचान हर अन्य पहचान से ऊपर होनी चाहिए।
5️⃣ नागरिक कर्तव्यों का पालन – कानून सबके लिए समान
उन्होंने कहा कि भारत के कई संकट इसलिए पैदा होते हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि कानून “दूसरों पर लागू होता है, मुझ पर नहीं”।
यदि हर छात्र, शिक्षक, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक अपने दायित्वों को समझे, तो पंच प्रण अपने-आप भारत को विकसित राष्ट्र की ओर ले जाएंगे।
India Vision 2047: सहयोग से ही बदलेगी तस्वीर
सीएम योगी ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक शब्द नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चरित्र है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि देश एक दिशा में चल पड़े, तो 2047 तक विकसित भारत का सपना अवश्य पूरा होगा—एक ऐसा भारत जहाँ न जाति-भाषा का विभाजन हो, न अभाव की पीड़ा, न आपदा में असहायता।
कार्यक्रम में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह और पूर्व महापौर अंजू चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।












