नई दिल्ली (08 फरवरी 2026)। बजट में टैक्स स्लैब भले न बदले हों, लेकिन असली बदलाव कागज़ों और प्रक्रियाओं में छिपा है। 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने जा रहा है, और इसका सीधा असर आपकी ITR Filing पर पड़ेगा। फॉर्म बदलेंगे, डेडलाइन बदलेगी, कुछ टैक्स ट्रीटमेंट बदलेंगे और कुछ प्रक्रियाएं आसान होंगी।
यही वजह है कि इस बार ITR फाइल करने से पहले नियम समझ लेना ज्यादा जरूरी है, वरना छोटी चूक भी नोटिस की वजह बन सकती है। आइए, 7 बड़े सवालों के जरिए पूरी तस्वीर साफ करते हैं।
ITR Filing: नए फॉर्म कब आएंगे?
बजट भाषण में स्पष्ट किया गया कि 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा। इसके साथ ही ITR फॉर्म्स को सरल (Simplified) और कम कागजी बनाया जाएगा। उम्मीद है कि नए फॉर्म्स जल्दी नोटिफाई होंगे ताकि टैक्सपेयर्स के लिए अनुपालन आसान हो।
यह बदलाव Income Tax Department की उस पहल का हिस्सा है, जिसमें टैक्स फाइलिंग को कम जटिल बनाने पर जोर है।
क्या Revised ITR की डेडलाइन बढ़ गई है?
हाँ। अब तक रिवाइज्ड ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर थी। प्रस्ताव के अनुसार इसे बढ़ाकर 31 मार्च किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए मामूली फीस देनी होगी।
मतलब—अगर आपने गलती कर दी, तो उसे सुधारने के लिए अब आपके पास ज्यादा समय होगा।
क्या ITR फाइलिंग की मूल डेडलाइन बदली है?
- ITR-1 और ITR-2 भरने वालों के लिए आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहेगी।
- नॉन-ऑडिट बिजनेस या ट्रस्ट केस में अब रिटर्न 31 अगस्त तक फाइल किया जा सकेगा।
यानी कुछ श्रेणियों को अतिरिक्त समय मिलेगा।
शेयर बायबैक अब कैपिटल गेन माना जाएगा
बजट 2026 में बड़ा बदलाव यह है कि शेयर बायबैक से होने वाली कमाई को अब कैपिटल गेन की तरह टैक्स किया जाएगा।
- कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स दर: 22%
- नॉन-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए: 30%
इसका मकसद टैक्स आर्बिट्रेज (Tax Arbitrage) रोकना है, जो अब तक कई प्रमोटर्स इस्तेमाल करते थे।
Updated Return के नियमों में क्या बदलाव?
अब टैक्सपेयर्स को Updated Return फाइल करने की अनुमति होगी, यदि वे पहले क्लेम किए गए नुकसान (Loss) को कम दिखाना चाहते हैं।
यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और पुराने व नए—दोनों कानूनों पर लागू रहेगा।
Nil Deduction Certificate के लिए ऑटोमेटेड प्रोसेस
छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत—अब Nil Deduction Certificate पाने की प्रक्रिया नियम-आधारित ऑटोमेटेड सिस्टम से होगी। मतलब कम दौड़भाग, कम कागज, ज्यादा सुविधा।
विदेशी संपत्ति खुलासा योजना (6 महीने की विंडो)
सरकार ने छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स, टेक कर्मचारियों, NRI और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए 6 महीने की Foreign Asset Disclosure Scheme शुरू करने का प्रस्ताव रखा है।
इस योजना के तहत, एक निश्चित सीमा से कम विदेशी संपत्ति या आय का खुलासा करने का मौका मिलेगा—बिना भारी पेनल्टी के।
निष्कर्ष
टैक्स स्लैब भले न बदले हों, लेकिन ITR Filing की प्रक्रिया में ये बदलाव आपकी फाइलिंग रणनीति को प्रभावित करेंगे। खासकर रिवाइज्ड रिटर्न की बढ़ी डेडलाइन, बायबैक टैक्स नियम और अपडेटेड रिटर्न के प्रावधान—ये तीन बातें इस साल सबसे ज्यादा ध्यान मांगती हैं।
1 अप्रैल के बाद ITR फाइल करते समय पुराने नियमों की आदत छोड़नी होगी। नए फॉर्म, नई समय-सीमा और नए प्रावधान—यही इस बार की असली तैयारी है।













