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कन्या सुमंगला योजना: यूपी की 27 लाख से अधिक बेटियों को मिला आर्थिक संबल, जन्म से उच्च शिक्षा तक सरकार बनी सहारा

On: June 7, 2026
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कन्या सुमंगला योजना, यूपी की 27 लाख से अधिक बेटियों को मिला आर्थिक संबल
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लखनऊ|07 जून 2026: प्रदेश में बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में चलाई जा रही कन्या सुमंगला योजना अब एक बड़े सामाजिक बदलाव की मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित यह महत्वाकांक्षी योजना लाखों परिवारों के लिए भरोसे का आधार बनी है। जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहयोग प्रदान करने वाली यह योजना न केवल बेटियों के भविष्य को सुरक्षित कर रही है, बल्कि समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच को भी मजबूत बना रही है।

महिला कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश की 27,37,703 बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है। इसके तहत 674.15 करोड़ रुपये की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि बेटियों के सशक्तीकरण को लेकर सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंच रही हैं।

डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता, खत्म हुई बिचौलियों की भूमिका

योजना को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। आवेदन से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। इससे पात्र परिवारों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की मदद से सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाती है। इस व्यवस्था ने न केवल प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि भ्रष्टाचार और बिचौलियों की संभावना को भी लगभग समाप्त कर दिया है।

छह चरणों में मिलती है आर्थिक सहायता

वर्ष 2019 में शुरू की गई कन्या सुमंगला योजना बालिका के जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों पर आर्थिक सहयोग प्रदान करती है। संशोधित व्यवस्था के तहत एक पात्र बालिका को कुल 25 हजार रुपये की सहायता दी जाती है।

योजना के अनुसार, बालिका के जन्म पर 5,000 रुपये, एक वर्ष तक पूर्ण टीकाकरण होने पर 2,000 रुपये, कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा-6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा-9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये तथा हाईस्कूल या इंटरमीडिएट के बाद डिग्री अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह चरणबद्ध आर्थिक सहयोग उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में परेशानी महसूस करते हैं।

बेटियों के प्रति सामाजिक सोच बदलने की पहल

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इन्दुमती ने कहा कि कन्या सुमंगला योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र बालिका योजना के लाभ से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बेटियों को सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

महिला सशक्तीकरण की मजबूत नींव

प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में चल रही योजनाओं के बीच कन्या सुमंगला योजना एक ऐसी पहल के रूप में उभरी है, जो आर्थिक सहायता के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी माध्यम बन रही है। लाखों परिवारों तक पहुंच चुकी यह योजना बेटियों के बेहतर भविष्य, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

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