उज्जैन (Sun, 15 Feb 2026)- उज्जैन में महाशिवरात्रि का पर्व इस बार आस्था, परंपरा और अलौकिक भक्ति का अनोखा संगम बनकर सामने आया। भगवान महाकालेश्वर के दरबार में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने “जय श्री महाकाल” के जयघोष के साथ ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा शहर शिवमय नजर आया। रात गहराती रही, लेकिन भक्ति का उत्साह कम नहीं हुआ। महाकाल मंदिर में आयोजित विशेष भस्मारती और पंचामृत अभिषेक ने इस धार्मिक पर्व को और भी दिव्य बना दिया।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन करने की संभावना जताई गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर के पट रविवार तड़के 2:30 बजे खोले गए, जो लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर की गई है।
महाशिवरात्रि 2026 महाकाल दर्शन: भस्मारती और पंचामृत अभिषेक बना आकर्षण का केंद्र
महाशिवरात्रि की पहली भोर में ही बाबा महाकाल का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और खांडसारी शक्कर से किए गए अभिषेक के बाद भगवान का चंदन लेप और सुगंधित द्रव्यों से श्रृंगार किया गया। परंपरा के अनुसार बाबा को उनकी प्रिय विजया (भांग) अर्पित की गई और श्वेत वस्त्र पहनाए गए।
झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच सम्पन्न हुई भस्मारती ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कई श्रद्धालु रातभर लाइन में खड़े रहे, लेकिन जैसे ही मंदिर के गर्भगृह के दर्शन हुए, हर चेहरे पर संतोष और आस्था साफ दिखाई दी। यही उज्जैन की महाशिवरात्रि की सबसे खास पहचान मानी जाती है — जहां भक्ति केवल रस्म नहीं, बल्कि अनुभव बन जाती है।
सेहरा दर्शन की परंपरा: साल में केवल एक बार मिलता है यह अवसर
महाशिवरात्रि के बाद अगले दिन बाबा महाकाल का विशेष सेहरा श्रृंगार किया जाता है, जो साल में सिर्फ एक बार होता है। इस दौरान सेहरे को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। स्थानीय मान्यता है कि सेहरे के फूल-पत्तियों को घर में रखने से सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
उज्जैन के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान भी है। महाशिवरात्रि के दौरान पूरा शहर एक बड़े उत्सव में बदल जाता है — गलियों से लेकर घाटों तक हर जगह शिव भक्ति की झलक दिखाई देती है।
दिनभर चला पूजन-अभिषेक, रातभर जारी रहा महाअभिषेक
भस्मारती के बाद दद्योदक आरती और भोग आरती संपन्न हुई। दोपहर 12 बजे उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक हुआ, जबकि शाम 4 बजे होल्कर और सिंधिया स्टेट की परंपरा के अनुसार विशेष पूजन किया गया।
रात्रि में कोटितीर्थ कुण्ड के तट पर भगवान कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण और पुष्प मुकुट श्रृंगार किया गया। इसके बाद रात 10:30 बजे से सम्पूर्ण रात्रि महाअभिषेक का आयोजन हुआ, जिसमें 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्रपाठ और वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक सम्पन्न किया गया।
भस्म लेपन, पंचामृत पूजन और पांच प्रकार के फलों से अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को नवीन वस्त्र, चंद्र मुकुट, छत्र और त्रिपुंड सहित भव्य आभूषणों से सजाया गया। भक्तों ने देर रात तक दर्शन कर पुण्य लाभ लिया।
16 फरवरी को होगा विशेष सेहरा दर्शन और भस्मारती
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 16 फरवरी 2026 की सुबह सेहरा दर्शन के बाद दोपहर 12 बजे विशेष भस्मारती होगी। इसके बाद भोग आरती और शिव नवरात्रि के पारणा के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा।
उज्जैन में महाशिवरात्रि का यह उत्सव एक बार फिर साबित कर गया कि बाबा महाकाल की नगरी में आस्था सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। भक्तों के चेहरों पर दिखती श्रद्धा और मंदिर परिसर में गूंजते जयकारे इस बात का प्रमाण हैं कि महाकाल का बुलावा आने पर दूरियां मायने नहीं रखतीं।













