नई दिल्ली/इंफाल, बुधवार 04 फरवरी 2026। लंबे राजनीतिक ठहराव और सामाजिक तनाव के दौर के बाद मणिपुर ने नई राजनीतिक शुरुआत देखी। वरिष्ठ भाजपा नेता Y. Khemchand Singh ने बुधवार को मणिपुर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि कुकी समुदाय की वरिष्ठ नेता Nemcha Kipgen उपमुख्यमंत्री बनीं। यह सत्ता-संरचना सिर्फ सरकार गठन नहीं, बल्कि भरोसा बहाली का एक प्रतीकात्मक संदेश भी मानी जा रही है।
भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायक दल ने मंगलवार को खेमचंद सिंह को अपना नेता चुना था। बुधवार को उन्होंने राज्यपाल Ajay Kumar Bhalla से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया और शपथ ग्रहण संपन्न हुआ।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद सरकार गठन का दावा
राजभवन में हुई औपचारिकताओं के बाद नई सरकार का गठन तेज़ी से आगे बढ़ा। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब राज्य फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन के तहत था और 60 सदस्यीय विधानसभा निलंबित अवस्था में थी। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, इसलिए यह बदलाव संवैधानिक समय-सीमा के भीतर राजनीतिक सक्रियता की वापसी भी है।
पिछले वर्ष 9 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री N. Biren Singh ने इस्तीफा दिया था। 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठे थे, जिनका असर लंबे समय तक दिखा।
2023 की जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि और नई सरकार का संकेत
इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेयी और आसपास की पहाड़ियों में बसे कुकी समुदाय के बीच 2023 में भड़की हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों लोग बेघर हुए। अविश्वास, असुरक्षा और विस्थापन की इस पृष्ठभूमि में मणिपुर मुख्यमंत्री के साथ कुकी समुदाय से उपमुख्यमंत्री का चयन एक संतुलित राजनीतिक संदेश देता है—प्रतिनिधित्व, सहभागिता और संवाद की ओर।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संयोजन “साझा शासन” की भावना को संस्थागत रूप देने की कोशिश है, ताकि सामाजिक दरारों पर मरहम लगाया जा सके।
भाजपा विधायक दल और राजग की बैठकों में सर्वसम्मति
राज्य भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक में भाजपा के 37 विधायकों में से 35 मौजूद रहे। केंद्रीय पर्यवेक्षक Tarun Chugh, पूर्वोत्तर प्रभारी Sambit Patra और प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी भी उपस्थित रहीं। दो विधायक अस्वस्थता के कारण नहीं आ सके।
इसके बाद मणिपुर भवन में राजग के घटक दलों—National People’s Party (6), Naga People’s Front (5), तीन निर्दलीय और भाजपा विधायकों—की संयुक्त बैठक हुई। यहां खेमचंद सिंह को राजग विधायक दल का नेता और नेमचा किपगेन को उपनेता चुना गया।
समुदायों के साथ संबंध: खेमचंद की स्वीकार्यता
राजग के सदस्य और निर्दलीय विधायक सपाम निशिकांत सिंह ने कहा कि खेमचंद सिंह के मैतेयी, कुकी और नगा—तीनों प्रमुख समुदायों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। यही कारण है कि वे सर्वस्वीकृत विकल्प बनकर उभरे। दोनों बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और विधानसभा अध्यक्ष Satyabrata Singh की मौजूदगी भी राजनीतिक निरंतरता का संकेत रही।
विधानसभा गणित: किसके पास कितनी ताकत
2022 के चुनाव में भाजपा ने 32 सीटें जीती थीं, जो बाद में दलबदल के चलते 37 तक पहुंचीं। जदयू के छह में से पांच विधायक भाजपा में शामिल हो गए। वर्तमान परिदृश्य में:
- भाजपा: 37
- एनपीपी: 6
- एनपीएफ: 5
- कांग्रेस: 5
- कुकी पीपुल्स अलायंस: 2
- जदयू: 1
- निर्दलीय: 3
- 1 सीट रिक्त (एक विधायक के निधन के कारण)
यह गणित नई सरकार को स्पष्ट बहुमत और स्थिरता का आधार देता है।
राजनीतिक संदेश: प्रतिनिधित्व, संतुलन और स्थिरता
मणिपुर मुख्यमंत्री के रूप में खेमचंद सिंह और डिप्टी सीएम के तौर पर नेमचा किपगेन का चयन प्रतीकात्मक राजनीति से आगे जाकर व्यावहारिक संतुलन की कोशिश है। एक ओर मैतेयी नेतृत्व, दूसरी ओर कुकी प्रतिनिधित्व—यह संरचना बताती है कि नई सरकार की प्राथमिकता शांति, पुनर्वास और विश्वास बहाली होगी।
राज्य लंबे समय से संवाद की कमी, अविश्वास और प्रशासनिक जड़ता से जूझ रहा था। नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह जमीन पर भरोसे की वापसी कर सके।
आगे की राह
सरकार गठन के साथ उम्मीदें भी बंधी हैं—राहत शिविरों में रह रहे परिवारों की वापसी, सामुदायिक संवाद की बहाली, और प्रशासनिक मशीनरी का पुनर्संचालन। राजनीतिक स्थिरता यहां सामाजिक स्थिरता की पहली शर्त है।
नई सरकार की असली परीक्षा अब शुरू होती है।













