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मानसून की विदाई के बाद भी क्यों हो रही बारिश? सुपर अल नीनो और पश्चिमी विक्षोभ का क्या है कनेक्शन

On: October 12, 2026
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मानसून की विदाई के बाद भी क्यों हो रही बारिश
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नई दिल्ली/12 अक्टूबर 2026: मानसून की विदाई का दौर शुरू होने के बाद भी उत्तर भारत में बारिश का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी और बिजली कड़कने से मौसम ने अचानक करवट ले ली। रात से शुरू हुआ बारिश का दौर सुबह तक जारी रहा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब दक्षिण-पश्चिम मानसून विदा हो रहा है, तो बादल दोबारा क्यों बरस रहे हैं?

मौसम में आए इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और वायुमंडलीय परिस्थितियों की अहम भूमिका बताई जा रही है। वहीं, प्रशांत महासागर में अल नीनो की संभावित स्थिति को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, किसी एक मौसम घटना को सीधे सुपर अल नीनो या जलवायु परिवर्तन का परिणाम मानने से पहले वैज्ञानिक पुष्टि जरूरी है।

मानसून के बाद बारिश की क्या है वजह?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में इस समय बारिश की एक प्रमुख वजह पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में मौजूद नमी के बीच होने वाली परस्पर क्रिया हो सकती है। पश्चिमी विक्षोभ ऐसी मौसमी प्रणाली है, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र की ओर से आगे बढ़ते हुए उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को प्रभावित करती है।

जब यह प्रणाली सक्रिय होती है, तो पहाड़ी राज्यों के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल, बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। यदि वातावरण में पर्याप्त नमी मौजूद हो और तापमान में भी अंतर हो, तो बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है।

इसलिए मानसून की वापसी का अर्थ यह नहीं है कि देश के सभी हिस्सों में बारिश तुरंत बंद हो जाएगी। मानसून के अलावा भी कई मौसमी प्रणालियां वर्षा करा सकती हैं।

क्या सुपर अल नीनो बिगाड़ रहा है मौसम का गणित?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका प्रभाव दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा, तापमान और मौसमी चक्र पर पड़ सकता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में चेयर प्रोफेसर और SAFAR के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर गुफरान बेग के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति सामान्य से अधिक शक्तिशाली हो सकती है।

हालांकि, समुद्र के तापमान में 3.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि और अगले दो महीनों में इसके 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। समुद्र के तापमान में बदलाव को किस आधार अवधि से मापा गया है, यह जानना भी जरूरी है। इसलिए इन आंकड़ों को आधिकारिक वैज्ञानिक आकलन के बिना निश्चित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

अल नीनो का प्रभाव मुख्य रूप से व्यापक जलवायु पैटर्न पर पड़ता है। दिल्ली-NCR में किसी खास दिन हुई बारिश की तत्काल वजह जानने के लिए स्थानीय मौसम प्रणालियों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के विश्लेषण को देखना अधिक उपयुक्त होगा।

दिल्ली-NCR में अचानक तेज बारिश कैसे हुई?

दिल्ली-NCR में बारिश के दौरान वातावरण की नमी, तापमान का अंतर और ऊपरी वायुमंडल में हवा की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी ठंडी हवाएं जब मैदानी इलाकों की अपेक्षाकृत गर्म और नमी वाली हवा के संपर्क में आती हैं, तो बादलों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

ऐसी स्थिति में गरज-चमक के साथ कम समय में तेज बारिश हो सकती है। तेज हवाओं के झोंके और बिजली गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है।

मौसम की इन घटनाओं को समझने के लिए केवल मानसून की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं है। हवा की दिशा, नमी, तापमान और सक्रिय मौसमी प्रणालियों को एक साथ समझना जरूरी होता है।

IMD की चेतावनी: कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि की आशंका

12 अक्टूबर के लिए उपलब्ध कराई गई मौसम संबंधी जानकारी के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में 12 से 20 सेंटीमीटर तक अत्यधिक भारी बारिश और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तथा हरियाणा में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश का उल्लेख है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी जानकारी दी गई है।

इन आंकड़ों और चेतावनियों की आधिकारिक पुष्टि के लिए IMD का संबंधित बुलेटिन देखना जरूरी है। मौसम का पूर्वानुमान समय और स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए यात्रा या खेती से जुड़ी योजना बनाने से पहले ताजा चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए।

15 अक्टूबर तक दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कैसा रहेगा मौसम?

उपलब्ध कराए गए पूर्वानुमान के अनुसार, 12 और 13 अक्टूबर को दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इसके बाद 14 और 15 अक्टूबर को बारिश का दायरा बढ़ने की संभावना जताई गई है।

इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कुछ झोंकों के 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान दिया गया है। गरज-चमक और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है। दिल्ली में तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का पूर्वानुमान है।

हालांकि, इन तारीखों के लिए मौसम की वास्तविक स्थिति और चेतावनी के स्तर की पुष्टि नवीनतम आधिकारिक बुलेटिन से की जानी चाहिए।

पहाड़ों से दक्षिण भारत तक बारिश का असर

उपलब्ध पूर्वानुमान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 13 से 15 अक्टूबर के बीच व्यापक बारिश की संभावना बताई गई है। हिमाचल प्रदेश में 14 और 15 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि उत्तराखंड में 12 से 18 अक्टूबर तक बारिश का दौर बने रहने की आशंका जताई गई है।

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। केरल, माहे, कर्नाटक के तटीय और दक्षिणी आंतरिक हिस्सों, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल तथा तटीय आंध्र प्रदेश में 15 से 18 अक्टूबर के बीच भारी बारिश की संभावना बताई गई है।

इसके अतिरिक्त अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाके, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में भी रुक-रुककर बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों के लिए जारी पूर्वानुमान में बदलाव संभव है।

किसानों और आम लोगों को क्यों सतर्क रहने की जरूरत?

अक्टूबर में होने वाली बेमौसम बारिश का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहता। खेतों में खड़ी फसलों, कटाई की तैयारी, खुले में रखे अनाज और दैनिक आवागमन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। तेज हवाओं और ओलावृष्टि से स्थानीय स्तर पर नुकसान की आशंका रहती है।

दिल्ली-NCR में जलभराव, यातायात की रफ्तार धीमी होने और बिजली गिरने जैसी परिस्थितियां परेशानी बढ़ा सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहना बेहतर है।

निष्कर्ष: मानसून की विदाई के बाद भी बारिश होना असामान्य नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ, वातावरण में नमी और तापमान का अंतर उत्तर भारत में बारिश की वजह बन सकते हैं। अल नीनो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है, लेकिन दिल्ली-NCR की किसी खास बारिश को सुपर अल नीनो से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं। इसलिए मौसम के इस बदलाव को समझने के लिए ताजा IMD पूर्वानुमान और प्रमाणित जलवायु आकलन पर भरोसा करना सबसे उचित होगा।

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