आगरा, 26 जुलाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आगरा से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार के अनुसार, इस पहल से उच्च शिक्षा के लगभग 1.28 लाख शिक्षकों सहित करीब 10 लाख लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कई शिक्षकों को योजना के कैशलेस हेल्थ कार्ड वितरित किए। इस अवसर पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और उच्च शिक्षा विभाग के बीच योजना के संचालन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित किया गया।
PNB के साथ हुआ समझौता, मिलेगी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना की शुरुआत उच्च शिक्षा मंत्री के गृह जनपद आगरा से की गई है। उन्होंने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से शुरू की गई यह व्यवस्था शिक्षकों और कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल इलाज की सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत के समय सामाजिक सुरक्षा का भरोसा भी देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी परिवार पर अचानक आने वाली स्वास्थ्य संबंधी आपदा आर्थिक संकट में न बदले, इसी सोच के साथ सरकार यह पहल लेकर आई है।
उन्होंने कहा, “हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि किसी को अस्पताल जाने की नौबत न आए, लेकिन दुर्घटनाएं और बीमारियां पहले से सूचना देकर नहीं आतीं। ऐसे समय में परिवार को यह भरोसा होना चाहिए कि सरकार और बैंक उसके साथ खड़े हैं।”
शिक्षकों का स्थान समाज में हमेशा सर्वोच्च रहा है
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में प्राचीन काल से गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा रही है।
उन्होंने कहा कि अभिभाजित भारत में स्थित तक्षशिला विश्वविद्यालय शिक्षा का प्रमुख केंद्र था, जहां जीवन के विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान प्रदान किया जाता था। ऐसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में आज के शिक्षकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की दी सलाह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले समाचार पत्रों की खबरों पर लोगों का भरोसा इसलिए होता था क्योंकि उनके पीछे जवाबदेही तय होती थी।
उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर कोई भी गुमनाम अकाउंट बनाकर गलत जानकारी फैला सकता है, जिससे समाज में भ्रम और तनाव पैदा होता है। इसलिए छात्रों को सही और गलत जानकारी की पहचान करना सिखाना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
AI और Google का करें समझदारी से उपयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक समय की आवश्यकता हैं। उनसे दूरी बनाना समाधान नहीं है, बल्कि उनका सही और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग सीखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट और गूगल पर उपलब्ध हर जानकारी पूरी तरह सही नहीं होती। इसलिए छात्रों में पुस्तकें पढ़ने, पुस्तकालय जाने और प्रमाणिक संदर्भ सामग्री का अध्ययन करने की आदत विकसित करनी होगी। शिक्षकों को इस दिशा में नेतृत्व करते हुए युवाओं को तथ्य आधारित अध्ययन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना चाहिए।
शिक्षकों से की नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने की अपील
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि उनमें अनुशासन, आत्मअनुशासन, तथ्यपरक सोच और जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार भी विकसित करें। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक नई पीढ़ी को सही दिशा देंगे, तो देश का वर्तमान भी मजबूत होगा और भविष्य भी सुरक्षित बनेगा।








