लखनऊ (Fri, 11 Sep 2026)। अयोध्या को चित्रकूट से जोड़ने वाले राम वन गमन मार्ग में निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद दरारें पड़ने को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने इस मामले पर नाराजगी जताई और सड़क को शीघ्र ठीक कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और लोक निर्माण विभाग (राष्ट्रीय मार्ग) के अधिकारियों से सड़क में दरार आने के कारणों की जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सीएम ने साफ कहा कि सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राम वन गमन मार्ग की गुणवत्ता पर सीएम योगी ने मांगा जवाब
समीक्षा बैठक में चित्रकूट जिले में श्रृंगवेरपुर धाम के निकट राम वन गमन मार्ग में आई दरारों का मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित ठेकेदार को जल्द डिबार कराने को कहा।
योगी आदित्यनाथ ने निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों को चेताया कि सड़क परियोजनाओं में गुणवत्ता की निगरानी केवल कागजी प्रक्रिया न रहे। निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन और काम पूरा होने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच, दोनों स्तरों पर पूरी सतर्कता बरतनी होगी।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मार्ग धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ता है। अयोध्या और चित्रकूट दोनों ही उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं और इनसे जुड़े मार्गों पर श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
ठेकेदार और स्वतंत्र अभियंता को डिबार करने की संस्तुति
राम वन गमन मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय मार्ग के मुख्य अभियंता ए.के. जैन ने 8 सितंबर को नई दिल्ली की ठेकेदार फर्म एसएंडपी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और स्वतंत्र अभियंता एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट को डिबार करने के लिए MoRTH को पत्र भेजा था।
विभाग की ओर से प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय और अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को निलंबित करने की संस्तुति भी की गई है। अब इन संस्तुतियों पर संबंधित स्तर से निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
20 अगस्त को कराई गई थी सड़क की जांच
इससे पहले 20 अगस्त को MoRTH की ओर से स्वतंत्र गुणवत्ता समीक्षक के माध्यम से क्षतिग्रस्त सड़क की जांच कराई गई थी। अब मरम्मत किस तरह और कितने हिस्से में की जानी है, इसका निर्धारण करने के लिए मंत्रालय के अधिकारी दोबारा चित्रकूट का दौरा कर सकते हैं।
सरकार की नजर फिलहाल सड़क को जल्द से जल्द दुरुस्त कराने के साथ-साथ इस बात पर भी है कि आखिर निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क में दरार क्यों आई। मुख्यमंत्री के निर्देशों से संकेत साफ है कि केवल मरम्मत कर मामले को खत्म करने के बजाय जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर रहेगा।
पिछले साल अक्टूबर में पूरा हुआ था निर्माण
राम वन गमन मार्ग के जिस हिस्से में दरारें आई हैं, उसका निर्माण कार्य पिछले वर्ष अक्टूबर में पूरा हुआ था। ठेकेदार ने पैकेज-दो के तहत 14.16 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया था। इसी हिस्से में दरारें सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
हाल के समय में कानपुर एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं के बाद अब राम वन गमन मार्ग में सामने आई खराबी को भी गंभीरता से देखा जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा गुणवत्ता की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने पर दिया गया जोर सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।








