लखनऊ/13 जून 2026। उत्तर प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही “मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना” लागू करने की तैयारी में है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल योजना के लिए विकसित ऑनलाइन पोर्टल का बीटा वर्जन परीक्षण के दौर से गुजर रहा है और पात्र लाभार्थियों का डेटा तेजी से जुटाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए शुरू हुई डेटा जुटाने की प्रक्रिया
योजना के सफल संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज़) ने बड़े स्तर पर डेटा संग्रहण अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, पहले कई मामलों में नाम, जन्मतिथि, आधार संख्या और पारिवारिक विवरण में त्रुटियों के कारण स्वास्थ्य कार्ड जारी करने में परेशानी आती थी। यही वजह है कि इस बार रिकॉर्ड को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
साचीज़ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण एक समान प्रारूप में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एकत्र किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए।
3.5 लाख से अधिक कर्मचारियों का डेटा हुआ संकलित
योजना की तैयारी के तहत अब तक 3.5 लाख से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों का डेटा संकलित किया जा चुका है। विभाग का मानना है कि डेटा शुद्ध और प्रमाणित होने से स्वास्थ्य कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी और लाभार्थियों को समय पर योजना का लाभ मिल सकेगा।
अधिकारियों के मुताबिक, डेटा सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र व्यक्तियों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड जारी किए जाएंगे। यह कार्ड सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान उपयोग किया जा सकेगा।
सूचीबद्ध अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस उपचार
योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पात्र लाभार्थियों को इलाज के लिए अपनी जेब से तत्काल बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी। कार्ड धारक निर्धारित अस्पतालों में उपचार करा सकेंगे और इलाज का खर्च तय सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर बीमारियों, सर्जरी और आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में यह योजना शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। अक्सर इलाज के बढ़ते खर्च के कारण परिवारों पर वित्तीय दबाव बढ़ जाता है, जिसे यह योजना काफी हद तक कम कर सकती है।
पोर्टल के बीटा टेस्ट में परखी जा रही तकनीकी व्यवस्थाएं
साचीज़ की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, वर्तमान में पोर्टल के बीटा परीक्षण के दौरान कार्ड निर्माण, लाभार्थी सत्यापन, अस्पतालों के साथ समन्वय और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की बारीकी से जांच की जा रही है। परीक्षण सफल रहने के बाद योजना को औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।
लाखों परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
राज्य सरकार को उम्मीद है कि योजना लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके परिवार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच बना सकेंगे। इसके साथ ही महंगे इलाज के कारण होने वाले आर्थिक बोझ से भी बड़ी राहत मिलेगी। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए इसे राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी पहल माना जा रहा है।









