नई दिल्ली, 31 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर भारत ने वैश्विक अस्थिरता के बीच संतुलन और समझदारी से काम लिया, वहीं विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर भी अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है।
गुजरात के कोबा में ‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत बल्कि वर्तमान वैश्विक हालात और देश की राजनीतिक स्थिति पर भी खुलकर बात की।
जैन विरासत से विकास तक—पीएम का व्यापक संबोधन
प्रधानमंत्री ने कहा कि सम्राट संप्रति संग्रहालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जैन धर्म की अहिंसा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने इस मौके पर पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि दुर्लभ पांडुलिपियों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में लंबे समय तक लापरवाही बरती गई, जिसे अब सुधारा जा रहा है।
उन्होंने गुजरात के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि गांव-गांव को सड़कों से जोड़ने, हाई-स्पीड हाइवे बनाने और वंदे भारत ट्रेनों जैसी आधुनिक सुविधाओं ने राज्य की तस्वीर बदल दी है।
20 हजार करोड़ की परियोजनाएं: बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर
पीएम मोदी ने बताया कि इस मौके पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है। उनके अनुसार, ये प्रोजेक्ट न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में भी तेजी से बदलाव लाएंगे।
उन्होंने कहा, “ये परियोजनाएं इस पूरे इलाके को नई गति देंगी और आने वाले समय में विकास का नया अध्याय लिखेंगी।”
पश्चिम एशिया हालात: भारत की संतुलित नीति
पश्चिम एशिया हालात पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक संकट का असर हर देश पर पड़ा है, लेकिन भारत ने इसे संयम और दूरदर्शिता के साथ संभाला। उन्होंने कहा कि कई देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ीं, लेकिन भारत ने आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला।
पीएम मोदी के मुताबिक, “भारत हर संकट का सामना करने में सक्षम है और हमने यह साबित भी किया है।”
विपक्ष पर तीखा हमला: ‘अराजकता फैलाने की कोशिश’
प्रधानमंत्री ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह संकट की घड़ी में भी राजनीतिक लाभ की तलाश में है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोगों को भड़काकर ईंधन पंपों पर भीड़ लगाने और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने विपक्ष को “राजनीतिक गिद्ध” तक करार देते हुए कहा कि कुछ लोग देशहित से ऊपर अपनी राजनीति को रखते हैं और ऐसे संवेदनशील समय में भी हालात का फायदा उठाना चाहते हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी में भारत की दावेदारी
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सतत विकास भारत की प्राथमिकता बनी रहेगी।
निष्कर्ष: संकट में स्थिरता बनाम राजनीति
इस पूरे बयान से साफ संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार जहां वैश्विक संकट के बीच स्थिरता और संतुलन की बात कर रही है, वहीं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी अपने चरम पर हैं। पश्चिम एशिया हालात ने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि देश के भीतर भी सियासी बहस को तेज कर दिया है।













