नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। दवाओं के प्रचार और बिक्री से जुड़ी फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग प्रैक्टिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो इस मामले से जुड़े सुझावों और विचारों पर विचार करने के बाद सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी। इसका उद्देश्य दवा कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली अनुचित या अनैतिक मार्केटिंग गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना है।
फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग प्रैक्टिस पर बनेगी समिति
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में मांग की गई थी कि जब तक इस संबंध में प्रभावी कानून नहीं बन जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट दवा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय करे।
अदालत ने केंद्र के रुख को ध्यान में रखते हुए समिति के गठन का निर्देश दिया है। समिति मामले से जुड़े सुझावों और संभावित उपायों पर विचार करेगी और इसके बाद अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को देगी।
8 सितंबर को केंद्र ने मांगा था दो महीने का समय
इस मामले की पिछली सुनवाई 8 सितंबर को हुई थी। उस दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह तीन सदस्यों वाली एक समिति गठित करने की प्रक्रिया में है। सरकार के अनुसार, समिति का काम ऐसा कानूनी ढांचा सुझाना होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि फार्मास्युटिकल कंपनियां अनैतिक गतिविधियों में शामिल न हों।
केंद्र ने उस समय समिति को अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार के समक्ष रखने के लिए दो महीने का समय मांगा था। सरकार ने यह भी स्वीकार किया था कि दवा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों पर निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया था कि इस विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है और संभावित समाधान तलाशने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया है। समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि दवा कंपनियां किस तरह की अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं और ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए किस तरह का कानूनी ढांचा बनाया जा सकता है।
तब तक लागू रहेगा यूनिफॉर्म कोड
केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि समिति की रिपोर्ट आने और उस पर निर्णय होने तक यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP), 2024 ही इस क्षेत्र में लागू रहेगा।
इस व्यवस्था के जरिए फार्मास्युटिकल कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस पूरे नियामकीय ढांचे को लेकर आगे की दिशा समिति की सिफारिशों से तय हो सकती है।
29 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारत सरकार एक समिति गठित करे। समिति मामले से संबंधित सुझावों और विचारों पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगी।
पीठ ने केंद्र सरकार के अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) पर विचार करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की है। अब निगाहें समिति के गठन और उसकी ओर से सुझाए जाने वाले संभावित कानूनी उपायों पर रहेंगी।













