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पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन से की मुलाकात, व्यापार-निवेश से लेकर तकनीक तक इन मुद्दों पर हुई बात

On: October 5, 2026
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पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन से की मुलाकात
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नई दिल्ली (सोमवार, 5 अक्टूबर 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे पार्मेलीन और पीएम मोदी के बीच हुई बातचीत में व्यापार और निवेश से लेकर तकनीक, नवाचार, मोबिलिटी और दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने तक कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।

स्विस राष्ट्रपति की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी TEPA को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है। ऐसे में आर्थिक रिश्तों को नई रफ्तार देना इस यात्रा के केंद्र में है।

पीएम मोदी और गाइ पार्मेलीन की मुलाकात में व्यापार-निवेश पर जोर

हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी और गाइ पार्मेलीन के बीच हुई वार्ता में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के व्यापक पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर बातचीत हुई।

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। भारत और स्विट्जरलैंड की कोशिश TEPA से बने आर्थिक अवसरों को जमीन पर उतारने और कंपनियों के लिए निवेश तथा कारोबार की संभावनाओं का विस्तार करने की है।

TEPA की पहली वर्षगांठ के बीच अहम दौरा

पार्मेलीन की भारत यात्रा का आर्थिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट 1 अक्टूबर 2025 को लागू हुआ था। EFTA में स्विट्जरलैंड के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।

इस समझौते का मकसद भारत और EFTA देशों के बीच व्यापार की बाधाओं को कम करने के साथ निवेश को प्रोत्साहित करना और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खोलना है। स्विट्जरलैंड EFTA देशों में भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है।

पार्मेलीन 7 अक्टूबर को दूसरे भारत-EFTA ‘प्रॉस्पेरिटी समिट’ में भी हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में सरकार और कारोबारी जगत के प्रतिनिधि निवेश तथा सहयोग की नई संभावनाओं पर विचार करेंगे।

राष्ट्रपति भवन में हुआ औपचारिक स्वागत

इससे पहले स्विस राष्ट्रपति का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।

पार्मेलीन ने भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित बताया। उन्होंने अपनी भारत यात्रा को दोनों देशों की पुरानी और व्यापक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक कदम बताया।

स्विस राष्ट्रपति ने TEPA के एक वर्ष पूरे होने को भी अहम पड़ाव बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि अब दोनों देशों को अब तक की प्रगति के साथ भविष्य की साझेदारी की दिशा भी तय करनी है।

जयशंकर ने भी की स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता से पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति पार्मेलीन से मुलाकात की। जयशंकर ने भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी को गहरा करने और भारत-EFTA TEPA से पैदा हुए अवसरों को आगे बढ़ाने को लेकर स्विस राष्ट्रपति के दृष्टिकोण की सराहना की।

उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और पार्मेलीन के बीच बातचीत से दोनों देशों का सहयोग कई क्षेत्रों में आगे बढ़ेगा।

कारोबार के साथ रिसर्च और इनोवेशन पर भी नजर

भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच विज्ञान, अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में भी लंबे समय से सहयोग रहा है। मौजूदा समय में 330 से अधिक स्विस कंपनियां भारत में काम कर रही हैं।

पार्मेलीन के कार्यक्रम में 6 अक्टूबर को भारत सरकार के सदस्यों के साथ आगे की बैठकें और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दौरा भी शामिल है। इसके अलावा कारोबारी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा तथा वैज्ञानिक सहयोग पर एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम प्रस्तावित है।

उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा व्यापार और अकादमिक जगत का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इससे साफ है कि इस दौरे में कूटनीतिक संवाद के साथ आर्थिक, कारोबारी और तकनीकी सहयोग पर खास फोकस है।

भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को नई रफ्तार देने की कोशिश

तीन दिन की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू TEPA के बाद पैदा हुए अवसरों को वास्तविक निवेश और कारोबारी साझेदारी में बदलना है। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच पहले से मजबूत आर्थिक संबंध हैं, लेकिन नई तकनीक, इनोवेशन, निवेश और मोबिलिटी जैसे क्षेत्र भविष्य की साझेदारी में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

पार्मेलीन 7 अक्टूबर तक भारत में रहेंगे। इस दौरान होने वाली बैठकों और भारत-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट के जरिए दोनों पक्ष आर्थिक समझौते के पहले साल की प्रगति की समीक्षा करने के साथ आने वाले वर्षों के लिए सहयोग की दिशा तय करने पर जोर देंगे।

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