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पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से मुलाकात, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर हुई अहम बातचीत

On: September 11, 2026
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पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से मुलाकात
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नई दिल्ली/11 सितंबर 2026: नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर चर्चा की। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई यह मुलाकात रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

करीब दो सप्ताह के भीतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान मिले थे।

पीएम मोदी-पेजेश्कियान की बैठक में समुद्री सुरक्षा पर जोर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम मुद्दा बन गई है। भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बड़े पैमाने पर समुद्री मार्गों पर निर्भर है। ऐसे में रणनीतिक जलमार्गों में किसी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

पीएम मोदी-पेजेश्कियान की बैठक में भारत की ओर से नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री मार्गों को खुले एवं सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारत लगातार यह पक्ष रखता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही निर्बाध रहनी चाहिए।

नागरिक ढांचे की सुरक्षा भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। संघर्ष के दौरान अस्पताल, बंदरगाह, ऊर्जा प्रतिष्ठान और दूसरे नागरिक बुनियादी ढांचे प्रभावित होने से मानवीय संकट के साथ आपूर्ति व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है। इसलिए भारत क्षेत्रीय स्थिरता के साथ नागरिक ढांचे की सुरक्षा को भी महत्व देता है।

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भारत-ईरान की नजर

बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के रास्तों पर भी चर्चा हुई। व्यापार और निवेश भारत-ईरान संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसके साथ ऊर्जा सहयोग और द्विपक्षीय रिश्तों को नई गति देने के मुद्दे भी बातचीत के केंद्र में रहे।

भारत और ईरान के बीच आर्थिक रिश्तों की अपनी रणनीतिक अहमियत है। क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार के लिहाज से ईरान भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया की परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं, दोनों देशों के लिए आर्थिक सहयोग को बनाए रखना और नए अवसर तलाशना चुनौती भी है और जरूरत भी।

BRICS में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की वकालत

इससे पहले BRICS बिजनेस फोरम में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सदस्य देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच BRICS देशों को अपनी आर्थिक क्षमता और लचीलापन मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।

पेजेश्कियान ने वित्तीय साधनों के किसी एकाधिकार के जरिए वैध व्यापार में रुकावट पैदा किए जाने की संभावना पर भी चिंता जताई। उनका जोर ऐसी आर्थिक व्यवस्था तैयार करने पर था, जिसमें BRICS देशों के बीच व्यापार अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित तरीके से हो सके।

यह मुद्दा BRICS के भीतर आर्थिक सहयोग को लेकर चल रही व्यापक बहस से भी जुड़ा है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की मांग का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच भुगतान व्यवस्था को अधिक विविध बनाना और बाहरी वित्तीय जोखिमों को कम करना है।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच मुलाकात का महत्व

मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरान आर्थिक दबाव और रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जबकि क्षेत्रीय तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

भारत के लिए इस पूरे घटनाक्रम में संतुलित कूटनीति महत्वपूर्ण है। एक ओर नई दिल्ली अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में शांति, संवाद और सुरक्षित समुद्री मार्गों की जरूरत पर भी लगातार जोर देती रही है।

BRICS मंच पर भारत और ईरान की बढ़ती बातचीत इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाती है। द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों के साथ क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर दोनों देशों के रुख भी इस संवाद को खास बनाते हैं।

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