नई दिल्ली/7 अगस्त 2026: पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता देती है। पुलिस आधुनिकीकरण की इस योजना के तहत हथियार, वाहन, संचार उपकरण, तकनीक, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी संसाधनों पर खर्च किया जाता है। हालांकि, जारी राशि के उपयोग में राज्यों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
पुलिस आधुनिकीकरण में बंगाल और मध्य प्रदेश पीछे
वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान जारी निधि के उपयोग के आंकड़ों में पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश का प्रदर्शन कमजोर रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल ने 7.88 करोड़ रुपये में से केवल 1.38 करोड़ रुपये खर्च किए, यानी 17.46 प्रतिशत। मध्य प्रदेश को 13.93 करोड़ रुपये मिले, जिसमें 6.50 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ। यह करीब 46.70 प्रतिशत है।
हिमाचल प्रदेश भी पूरी राशि खर्च नहीं कर पाया। राज्य को 7.41 करोड़ रुपये मिले थे, जिनमें से 5.91 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसका उपयोग प्रतिशत 79.72 रहा।
100 फीसदी राशि खर्च करने वाले 15 राज्य
जारी आंकड़ों के मुताबिक 28 राज्यों में 15 राज्यों ने निर्धारित निधि का पूरा उपयोग किया। इनमें शामिल हैं—
- आंध्र प्रदेश
- असम
- बिहार
- अरुणाचल प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- हरियाणा
- कर्नाटक
- मणिपुर
- मिजोरम
- राजस्थान
- सिक्किम
- तमिलनाडु
- तेलंगाना
- त्रिपुरा
- उत्तर प्रदेश
केरल का प्रदर्शन भी लगभग पूरा रहा। उसने 99.86 प्रतिशत राशि का उपयोग किया।
राशि खर्च करने में देरी की वजह क्या?
केंद्र सरकार के अनुसार पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। कई बार राशि उपलब्ध होने के बावजूद परियोजनाएं समय पर जमीन पर नहीं उतर पातीं।
इसमें टेंडर जारी होने में देरी, उपकरणों और हथियारों के ट्रायल में समय लगना तथा खरीद प्रक्रिया लंबी होना प्रमुख कारण हैं। तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति में देरी भी परियोजनाओं की गति प्रभावित करती है। इसके अलावा खरीद प्रस्तावों को अलग-अलग समितियों से मंजूरी मिलने में लगने वाला समय भी एक बड़ी अड़चन बन जाता है।
पुलिस आधुनिकीकरण क्यों जरूरी?
‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य विषय हैं। फिर भी राज्यों के संसाधनों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार आधुनिक हथियार, संचार व्यवस्था, वाहन, तकनीकी और फोरेंसिक उपकरणों समेत विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक सहायता देती है।
ऐसे में राशि का समय पर और प्रभावी उपयोग केवल बजट का सवाल नहीं है। इसका सीधा संबंध पुलिस की कार्यक्षमता, तकनीकी क्षमता और बदलते अपराधों से निपटने की तैयारी से भी जुड़ा है।











