लखनऊ (Mon, 13 Oct 2025) — राजधानी लखनऊ में बिजली विभाग एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव करने जा रहा है। एक नवंबर से उपभोक्ताओं की हर बिजली से जुड़ी शिकायत का समाधान अब पारंपरिक उपकेंद्रों पर नहीं, बल्कि हेल्पलाइन नंबर 1912 के माध्यम से किया जाएगा। यानी अब “पास के सबस्टेशन जाकर समस्या बताने” का दौर खत्म होने जा रहा है।
अब हर शिकायत होगी डिजिटल, इंजीनियर तक पहुंचेगी GPS के ज़रिए
नई Power Distribution System के तहत उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत 1912 हेल्पलाइन पर दर्ज करानी होगी। वहां से यह शिकायत सीधे GPS सिस्टम के जरिए संबंधित बिजली अभियंता को भेजी जाएगी। अभियंता को तय समयसीमा में शिकायत का निस्तारण करना होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था जहां बिजली से जुड़ी अनियमितताओं और उपभोक्ताओं के साथ होने वाले विवादों को कम करेगी, वहीं शुरुआती महीनों में शिकायतों की संख्या बढ़ने की संभावना है। अब उपभोक्ता सीधे अभियंताओं से संपर्क नहीं कर पाएंगे, जिससे “फील्ड कनेक्शन” वाले पुराने तौर-तरीकों पर अंकुश लगेगा।
वर्टिकल सिस्टम में घटेगी अफसरों और कर्मियों की संख्या
नई व्यवस्था में विभाग का ढांचा वर्टिकल (Vertical Power Distribution Structure) में बदल रहा है। इसके चलते प्रशासनिक स्तर पर पदों की संख्या घटेगी।
- अधीक्षण अभियंता की संख्या तीन से चार कम होगी,
- अधिशासी अभियंता लगभग 16 तक घट जाएंगे,
- सहायक अभियंता 12 कम होंगे,
- जबकि अवर अभियंता की संख्या भी करीब 10 घटने की संभावना है।
बाबू वर्ग में लगभग 200 कर्मियों की कमी प्रस्तावित है, जिनमें केवल लखनऊ मध्य जोन से ही 57 हटाए जा सकते हैं। इसी तरह, अमौसी, जानकीपुरम और गोमती नगर जोन में भी कटौती की जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, करीब 1000 आउटसोर्स कर्मियों की छंटनी की तैयारी है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
क्या है नई वर्टिकल बिजली व्यवस्था
राजधानी में अभी चार जोनों में बिजली विभाग संचालित है, जिनके प्रमुख मुख्य अभियंता हैं। नई संरचना में हर जोन में दो अधीक्षण अभियंता होंगे — एक तकनीकी और एक वाणिज्यिक।
तकनीकी इकाई के तहत:
- 3 सहायक अभियंता,
- 6 जूनियर इंजीनियर (JE),
- 12 टेक्निकल ग्रेड कर्मी,
- 3 वाहन और 6 दोपहिया वाहन होंगे।
साथ ही 48 कुशल और 48 अकुशल श्रमिक रखे जाएंगे। ये दल 33 केवी उपकेंद्रों और घरेलू LT लाइन वन-टू फीडर के रखरखाव का काम संभालेंगे।
वहीं, वाणिज्यिक इकाई में चार अधिशासी अभियंता होंगे —
- एनएससी, लोड चेंज, नाम परिवर्तन और मीटरिंग से जुड़े मामलों के लिए,
- बिलिंग और बिल संशोधन कार्यों के लिए,
- राजस्व वसूली और अकाउंट सेक्शन के लिए,
- बिजली चोरी और रिकवरी कार्रवाई के लिए।
इनके अधीन कुल 11 सहायक अभियंता, 22 अवर अभियंता, और 22 टेक्निकल ग्रेड टू कर्मी रहेंगे। छापामार टीमों के लिए भी 3 सहायक अभियंता और 6 जेई नियुक्त होंगे।
असर: अभियंता पर बढ़ेगा काम का दबाव, लेकिन उपभोक्ता को मिलेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था के बाद अभियंताओं और आउटसोर्स कर्मियों पर काम का बोझ निश्चित रूप से बढ़ेगा, क्योंकि हर शिकायत जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज होगी। हालांकि विभाग का दावा है कि इससे बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और उपभोक्ताओं को समयबद्ध समाधान मिलेगा।
बिजली न आने या मीटर गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर अब फील्ड विजिट नहीं, बल्कि सेंट्रलाइज्ड रिस्पॉन्स सिस्टम काम करेगा। विभाग का मानना है कि इससे उपभोक्ता और अभियंता के बीच अनावश्यक टकरावों में भी कमी आएगी।
निष्कर्ष
लखनऊ की बिजली व्यवस्था एक नवंबर से पूरी तरह नए रूप में सामने आएगी। जहां एक ओर इससे विभागीय जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर फील्ड स्टाफ पर बोझ भी कई गुना बढ़ेगा। उपभोक्ताओं के लिए अब असली परीक्षा होगी — तकनीक आधारित इस Power Distribution System पर भरोसा करने की।












