लखनऊ|06 जून 2026: उत्तर प्रदेश में रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा है कि रेलवे नेटवर्क में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पूरी सख्ती के साथ लागू करने को कहा।
शनिवार को राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों, प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा रेल यातायात वाला राज्य है, जहां प्रतिदिन लाखों लोग रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
रेलवे सुरक्षा को मिलेगा तकनीक का मजबूत सहारा
मुख्यमंत्री ने रेलवे ट्रैक और स्टेशनों की निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। समीक्षा बैठक में बताया गया कि रेलवे ट्रैक सुरक्षा के लिए संयुक्त गश्त, ड्रोन आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन और निरीक्षण एप के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
इसके अलावा मुखबिर तंत्र को मजबूत करने, कबाड़ बाजारों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों और ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।
प्रतिदिन 30 लाख यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा
बैठक में डीजी रेलवे ने जीआरपी की वर्तमान संरचना की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 1867 में स्थापित जीआरपी उत्तर प्रदेश आज छह अनुभागों, 65 थानों और 89 अस्थायी चौकियों के माध्यम से कार्य कर रही है।
जीआरपी पर प्रतिदिन 3031 से अधिक ट्रेनों, करीब 1550 रेलवे स्टेशनों और 30 लाख से ज्यादा रेल यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इतने बड़े नेटवर्क को देखते हुए सुरक्षा संसाधनों और मानवबल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
त्योहारों और परीक्षाओं के दौरान विशेष भीड़ प्रबंधन
योगी आदित्यनाथ ने रेलवे स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि त्योहारों, भर्ती परीक्षाओं, धार्मिक आयोजनों और अन्य विशेष अवसरों पर यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
मुख्यमंत्री ने प्रवेश और निकास प्रबंधन, कतार व्यवस्था, सार्वजनिक घोषणाओं और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि रेलवे प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से भीड़ प्रबंधन को अधिक सफल बनाया जा सकता है।
महिला सुरक्षा और मानव तस्करी रोकने पर विशेष फोकस
बैठक में महिला सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रेलवे नेटवर्क में महिलाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों की बरामदगी से जुड़े अभियानों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन मुस्कान के तहत 1 जनवरी 2026 से 26 मई 2026 तक 860 बच्चों को सुरक्षित बरामद किया गया है। वहीं विभिन्न अभियानों के जरिए अब तक 2325 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिली है।
हरदोई जीआरपी थाना बना मिसाल
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि हरदोई जीआरपी थाना उत्तर भारत का पहला आईएसओ 9001 प्रमाणित जीआरपी थाना बन चुका है। मुख्यमंत्री ने इसे पुलिसिंग और सेवा गुणवत्ता के क्षेत्र में एक सकारात्मक उपलब्धि बताया।
2027 अर्धकुंभ की तैयारियां अभी से शुरू करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार अर्धकुंभ को ध्यान में रखते हुए रेलवे सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यापक योजना अभी से तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित जिलों, रेलवे प्रशासन और अन्य एजेंसियों के बीच समयबद्ध समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जीआरपी के आधुनिकीकरण, अतिरिक्त मानव संसाधन की उपलब्धता और आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी। आवश्यकता पड़ने पर रेलवे मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश में रेल यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन, डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली आने वाले वर्षों में रेलवे नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बना सकती है।








