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रक्षा निर्यात में भारत की रिकॉर्ड छलांग: ₹38,424 करोड़ पार, 62.66% की ऐतिहासिक वृद्धि

On: April 2, 2026
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रक्षा निर्यात में भारत की रिकॉर्ड छलांग
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नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2026। एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर रहता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। रक्षा निर्यात में भारत की रिकॉर्ड छलांग ने न केवल वैश्विक मंच पर देश की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा को भी ठोस आधार दिया है।

वित्त वर्ष 2025-26 के ताजा आंकड़े इस बदलाव की कहानी खुद बयां करते हैं। इस दौरान भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक है। पिछले वर्ष के ₹23,622 करोड़ की तुलना में यह 62.66% की उल्लेखनीय वृद्धि है—एक ऐसा आंकड़ा जो महज संयोग नहीं, बल्कि नीति, तकनीक और भरोसे के सम्मिलित प्रयास का परिणाम है।

रक्षा निर्यात में भारत की रिकॉर्ड छलांग: आत्मनिर्भरता से वैश्विक भरोसे तक

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस उछाल के पीछे स्वदेशी तकनीक और उत्पादन क्षमता का तेजी से विस्तार प्रमुख कारण रहा है। ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियां, स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस और अन्य अत्याधुनिक रक्षा उपकरण अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।

यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है—यह उस भरोसे का संकेत है जो दुनिया अब भारतीय रक्षा उत्पादों पर जता रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत धीरे-धीरे “डिफेंस इम्पोर्टर” से “डिफेंस एक्सपोर्टर” बनने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।

सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी बनी ताकत

इस उपलब्धि की एक खास बात यह भी है कि इसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की मजबूत भागीदारी रही है।

  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान: ₹21,071 करोड़ (54.84%)
  • निजी क्षेत्र का योगदान: ₹17,353 करोड़ (45.16%)

यह संतुलन बताता है कि भारत का रक्षा इकोसिस्टम अब एकतरफा नहीं रहा। निजी कंपनियां भी नवाचार (innovation) और प्रतिस्पर्धा (competition) के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं।

80 से अधिक देशों तक पहुंचा भारत का रक्षा निर्यात

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारत अब 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। यह विस्तार केवल व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी (strategic partnership) का भी संकेत है।

दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कम लागत, विश्वसनीय तकनीक और समय पर डिलीवरी—ये तीनों कारक भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने जताई खुशी, पीएम मोदी के विजन का जिक्र

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर संतोष जताते हुए कहा कि यह भारत की मजबूत होती स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने सभी हितधारकों—रक्षा उत्पादन विभाग, निर्यातकों और उद्योग से जुड़े लोगों—की सराहना की।

वहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को इस सफलता का आधार बताया। उनके अनुसार, भारत अब तेजी से वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र (global defense manufacturing hub) बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आगे का रास्ता: क्या कायम रह पाएगी यह रफ्तार?

हालांकि आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन चुनौती यह है कि इस गति को बनाए रखा जाए। वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी उन्नयन और निर्यात नीतियों में निरंतर सुधार—ये सभी कारक आने वाले वर्षों में निर्णायक होंगे।

फिलहाल इतना साफ है कि रक्षा निर्यात में भारत की रिकॉर्ड छलांग केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है—जहां भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है।

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