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सीमांत नगालैंड प्रादेशिक प्राधिकरण पर त्रिपक्षीय समझौता, अमित शाह बोले—केंद्र हर संभव मदद करेगा

On: February 5, 2026
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सीमांत नगालैंड प्रादेशिक प्राधिकरण पर त्रिपक्षीय समझौता
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नई दिल्ली, 05 फरवरी 2026 (गुरुवार)। पूर्वोत्तर में शांति, संवाद और विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने भारत सरकार का गृह मंत्रालय, नगालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन के बीच सीमांत नगालैंड प्रादेशिक प्राधिकरण के गठन हेतु त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर कराए। यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समझौते के बाद अमित शाह ने स्पष्ट कहा, “केंद्र पूर्वी नगालैंड के विकास के लिए हर संभव मदद करेगा और अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा। एक-दो मुद्दों को छोड़कर बाकी सभी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2019 से अब तक पूर्वोत्तर में 12 महत्वपूर्ण समझौते किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य स्थिरता और समावेशी विकास को गति देना है।

‘केंद्र सरकार करेगी भरपूर मदद’: अमित शाह

अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार समझौतों को लागू कराने की अपनी परंपरा पर कायम है। उनके शब्दों में, “ईएनपीओ के प्रतिनिधियों को आश्वस्त करता हूं कि पूर्वी नगालैंड के विकास के लिए भरपूर सहायता दी जाएगी। आवश्यक धनराशि का निर्णय लेकर उसे जारी किया जाएगा। संस्था की स्थापना के प्रारंभिक खर्च का वहन गृह मंत्रालय करेगा।”

यह संकेत भी महत्वपूर्ण है कि प्रस्तावित प्राधिकरण को प्रशासनिक ढांचे, संसाधन और शुरुआती वित्तीय संबल सीधे केंद्र से मिलेगा, जिससे कार्यान्वयन की रफ्तार प्रभावित न हो।

क्या बोले मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो

नगालैंड के मुख्यमंत्री Neiphiu Rio ने कहा, “यह समझौता आपसी विश्वास का प्रतीक है। यह पूर्वी नगालैंड ही नहीं, पूरे राज्य की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कदम है और विकास को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास करता है।”

मुख्यमंत्री के बयान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार इस ढांचे को टकराव की जगह सहभागिता (participatory governance) के मॉडल के रूप में देख रही है।

ENPO की पृष्ठभूमि और मांग

ईएनपीओ पूर्वी नगालैंड के छह जिलों में फैली आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च संस्था है। संगठन ने 2010 से दशकों की उपेक्षा का हवाला देते हुए अलग राज्य की मांग उठाई थी। बाद में केंद्र के साथ संवाद की प्रक्रिया में इसने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) जैसे ढांचे के तहत एक निश्चित स्तर की स्वायत्तता के प्रस्ताव को स्वीकार किया, जो अब सीमांत नगालैंड प्रादेशिक प्राधिकरण के रूप में आकार ले रहा है।

यह बदलाव मांग से समाधान तक की यात्रा को दर्शाता है—जहां अलगाव की जगह संस्थागत स्वायत्तता और विकास-उन्मुख प्रशासन को तरजीह दी गई।

क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता

  • पूर्वी नगालैंड में लंबे समय से विकास, प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक पहुंच को लेकर असंतोष रहा है।
  • त्रिपक्षीय मॉडल से विश्वास निर्माण और स्थानीय भागीदारी को बल मिलेगा।
  • केंद्र की प्रत्यक्ष वित्तीय और नीतिगत भागीदारी से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
  • पूर्वोत्तर में शांति समझौतों की श्रृंखला में यह एक और निर्णायक कड़ी है।

यह समझौता संकेत देता है कि संवाद-आधारित समाधान और चरणबद्ध स्वायत्तता, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय ढांचे के बीच संतुलन बनाने का प्रभावी रास्ता बन सकते हैं।

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