नई दिल्ली/8 अक्टूबर 2026: भारत-जापान संबंधों में एक भावनात्मक अध्याय उस समय फिर सामने आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से नई दिल्ली में मुलाकात की। पीएम मोदी ने शिंजो आबे को अपना प्रिय मित्र और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस मुलाकात का संबंध वाराणसी से भी जुड़ता है। दरअसल, 7 अक्टूबर को वाराणसी स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया था। इसका उद्घाटन अकी आबे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया।
पीएम मोदी ने अकी आबे से मुलाकात के बाद क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने अकी आबे से मुलाकात के बाद कहा कि उन्हें उनसे मिलकर खुशी हुई और वह भारत के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को बहुत महत्व देते हैं।
पीएम मोदी ने शिंजो आबे को याद करते हुए उन्हें अपना प्रिय मित्र और दूरदर्शी नेता बताया। उन्होंने कहा कि आबे ने भारत और जापान के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री ने वाराणसी में बने शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर को उनके योगदान के लिए उपयुक्त श्रद्धांजलि बताया। पीएम मोदी के अनुसार, यह स्मारक भारत-जापान मित्रता के लिए आबे के स्थायी योगदान की याद दिलाता रहेगा।
वाराणसी में क्या है शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर?
शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में बनाया गया है। इसे भारत-जापान संबंधों और शिंजो आबे की भारत के साथ विशेष मित्रता की स्मृतियों से जोड़ा गया है।
7 अक्टूबर को अकी आबे और योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया। कॉरिडोर में भारत-जापान संबंधों तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की दोस्ती से जुड़ी तस्वीरों और स्मृतियों को स्थान दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना विभाग ने भी इसके उद्घाटन की पुष्टि की है।
अकी आबे इस अवसर पर भावुक भी हुईं। उन्होंने अपने पति के वाराणसी से जुड़ाव को याद किया और भारत की ओर से इस स्मृति को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के लोगों के प्रति आभार जताया।
शिंजो आबे और वाराणसी का क्या कनेक्शन है?
शिंजो आबे का वाराणसी से संबंध केवल एक औपचारिक राजनीतिक यात्रा तक सीमित नहीं था। दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन्होंने काशी का दौरा किया था और गंगा आरती में हिस्सा लिया था। यही वह यात्रा थी, जिसने भारत-जापान संबंधों के सांस्कृतिक पहलू को भी एक खास पहचान दी।
इसके अलावा वाराणसी और जापान के प्राचीन शहर क्योटो के बीच भी सांस्कृतिक संबंध हैं। 2014 में दोनों शहरों के बीच क्योटो-वाराणसी पार्टनर सिटी एग्रीमेंट हुआ था। बाद में जापान की सहायता से वाराणसी में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का निर्माण हुआ, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में किया था।
यानी वाराणसी में बना यह स्मृति कॉरिडोर एक तरह से कई कड़ियों को जोड़ता है—मोदी और आबे की व्यक्तिगत मित्रता, काशी-जापान का सांस्कृतिक जुड़ाव और भारत-जापान के व्यापक रणनीतिक संबंध।
रुद्राक्ष सेंटर से भी जुड़ी है आबे की याद
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की कहानी में भी शिंजो आबे का नाम आता है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले बताया था कि जब आबे काशी आए थे, तब दोनों नेताओं के बीच रुद्राक्ष परियोजना के विचार पर चर्चा हुई थी।
जापान की सहायता से बने इस केंद्र को भारत-जापान सहयोग के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में इसके उद्घाटन के दौरान भी शिंजो आबे की भूमिका को याद किया था।
अब इसी परिसर में आबे के नाम पर मेमोरियल कॉरिडोर बनाया गया है। इस लिहाज से स्थान का चुनाव भी अपने आप में खास है—जहां कभी मोदी और आबे ने साथ मिलकर काशी की सांस्कृतिक विरासत को देखा था, वहीं अब आबे की स्मृतियां स्थायी रूप से संरक्षित की गई हैं।
कैसे हुई थी शिंजो आबे की हत्या?
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की 8 जुलाई 2022 को नारा शहर में एक चुनावी सभा के दौरान हत्या कर दी गई थी। वह चुनाव प्रचार के दौरान भाषण दे रहे थे, तभी तेत्सुया यामागामी ने उन पर घर में बनी बंदूक से गोली चलाई थी।
आबे को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। यामागामी को घटनास्थल से गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसने हत्या की बात स्वीकार की।
आबे की हत्या ने जापान को ही नहीं, बल्कि भारत समेत दुनिया के कई देशों को झकझोर दिया था। प्रधानमंत्री मोदी और आबे के बीच व्यक्तिगत मित्रता भी सार्वजनिक रूप से कई बार सामने आई थी। ऐसे में वाराणसी में उनकी स्मृति को स्थायी स्थान मिलना भारत-जापान संबंधों के उस दौर की याद को भी जीवित रखता है।
आज जब पीएम मोदी ने अकी आबे से मुलाकात के दौरान शिंजो आबे को फिर याद किया, तो उसके पीछे केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति नहीं थी। वाराणसी का यह नया स्मृति स्थल दोनों देशों के रिश्तों में आबे की भूमिका और काशी से उनके विशेष जुड़ाव को एक जगह समेटता है।













