नई दिल्ली/मंगलवार, 29 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने नकली दवाओं पर रोक लगाने से जुड़ी एक याचिका पर सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि नकली और मिलावटी दवाओं के निर्माण तथा बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए व्यापक व्यवस्था बनाने की मांग वाली याचिका की प्रति संबंधित अधिकारियों को विचार के लिए भेजी जाए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से पूछा कि क्या उन्होंने याचिका दाखिल करने से पहले इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों के सामने कोई सुझाव या प्रतिवेदन रखा था।
नकली दवाओं पर रोक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुनवाई के दौरान अश्विनी कुमार उपाध्याय ने मौजूदा व्यवस्था में कथित खामियों का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत का ध्यान उन खबरों की ओर भी दिलाया, जिनमें बंगलूरू के कई अस्पतालों में नकली कैंसर रोधी दवाओं की आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने कहा कि याचिका को सुप्रीम कोर्ट में लंबित रखने के बजाय इसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रतिवेदन के रूप में भेजना अधिक प्रभावी होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अपने स्तर से विचार कर सकते हैं।
अधिकारियों को भेजी जाएगी याचिका की प्रति
पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां प्रतिवादियों या संबंधित प्राधिकारियों को विभिन्न प्रकार की कार्रवाई करनी होती है, अदालत को सीधे मामले के गुण-दोष पर विचार करने के बजाय पहले संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था को मुद्दे पर विचार करने का अवसर देना उचित है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह याचिका के मुद्दों पर मामले के गुण-दोष के संबंध में कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका की एक प्रति संबंधित अधिकारियों को विचार के लिए भेजी जाए।
नकली और मिलावटी दवाओं का मुद्दा सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और दवा सुरक्षा से जुड़ा है। ऐसे में अदालत के इस निर्देश के बाद अब संबंधित अधिकारी याचिका में उठाए गए सुझावों और चिंताओं पर अपने स्तर पर विचार करेंगे।













