नई दिल्ली/29 अक्टूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को लेकर केंद्र सरकार से अहम सवाल पूछा है। अदालत जानना चाहती है कि यदि ई100 ईंधन पर चलने वाली गाड़ियों को अनुमति दी जाती है, तो देशभर में उनके लिए पर्याप्त इथेनॉल की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इथेनॉल आवंटन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने किसानों के हितों, आम लोगों की जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान हालिया मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए ई100 वाहनों के लिए ईंधन की उपलब्धता पर सवाल उठाया। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए विनिर्माण व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे।
ई100 वाहनों के लिए ईंधन की आपूर्ति कैसे होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति मिलती है, तो उनके लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्या होगी।
पीठ ने कहा कि उसने हाल ही में अखबारों में ऐसी खबरें देखी हैं, जिनमें ई100 ईंधन से चलने वाले वाहनों को अनुमति दिए जाने का उल्लेख किया गया है। अदालत ने इस संदर्भ में सवाल किया कि यदि ऐसे वाहनों को अनुमति दी जाती है, तो उनकी ईंधन संबंधी जरूरतें कैसे पूरी की जाएंगी।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने जवाब दिया कि इसके लिए विनिर्माण व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत होगी। अदालत की चिंता केवल वाहनों को तकनीकी मंजूरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि भविष्य में ऐसे वाहनों के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो सके।
पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण की नीति क्या है?
केंद्र सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति पर काम कर रही है। इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों के लिए बाजार उपलब्ध कराना और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 फीसदी से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है।
इस बीच, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों से संबंधित उत्सर्जन प्रमाणन प्रावधानों में ई85 के साथ ई100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया।
हालांकि, वाहनों को ई100 ईंधन पर चलने की अनुमति देने और देशभर में इस ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के बीच अंतर है। सुप्रीम कोर्ट का सवाल इसी व्यावहारिक चुनौती से जुड़ा है।
E85 और E100 ईंधन में क्या अंतर है?
इथेनॉल मिश्रण की मात्रा के आधार पर वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है।
- E85 ईंधन: इसमें लगभग 85 फीसदी इथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है।
- E100 ईंधन: इसमें लगभग शुद्ध इथेनॉल होता है।
- सामान्य पेट्रोल वाहन: इन्हें निर्धारित ईंधन मानकों और स्वीकृत इथेनॉल मिश्रण के अनुरूप बनाया जाता है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकें। इसके लिए इंजन, ईंधन प्रणाली और संबंधित तकनीकी मानकों का उपयुक्त होना जरूरी है।
ई100 वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केवल वाहन निर्माण में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। इथेनॉल का उत्पादन, भंडारण, परिवहन और वितरण भी इस व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को सशक्त बनाने पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इथेनॉल नीति पर विचार करते समय किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने इस मुद्दे को व्यापक जनहित और पर्यावरण से भी जोड़ा।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और किसानों के हित इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा होने चाहिए।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह अपनी दलीलों में किसानों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे।
सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि इथेनॉल को बढ़ावा मिलने से किसानों को लाभ हो सकता है। एक अन्य वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार की नीति में किसानों के हितों का भी ध्यान रखा गया है।
अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि इथेनॉल नीति का मूल्यांकन केवल ईंधन और वाहन तकनीक के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके साथ किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आम उपभोक्ताओं पर संभावित असर और पर्यावरण संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।
इथेनॉल आवंटन विवाद क्या है?
सुप्रीम कोर्ट में इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए आवंटन बढ़ाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस विवाद का संबंध तेल विपणन कंपनियों और एक समर्पित इथेनॉल निर्माता के बीच आवंटन से जुड़ा है।
इससे पहले 30 जून को शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्देश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, जिसमें इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए आवंटन बढ़ाने के अनुरोध पर कार्रवाई करने को कहा गया था।
एक तेल विपणन कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि हाईकोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) को संबंधित इथेनॉल निर्माता के आवंटन बढ़ाने के अनुरोध पर विचार करके निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारी नीति के तहत स्थापित समर्पित इथेनॉल संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटन का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे संयंत्र दीर्घकालिक खरीद समझौतों के तहत तेल विपणन कंपनियों को इथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए बाध्य होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए तय की है।
इथेनॉल नीति का आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब इथेनॉल की उपलब्धता, आवंटन व्यवस्था और नीति के व्यापक प्रभाव जैसे मुद्दे हैं। ई100 वाहनों को अनुमति देने से वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का रास्ता खुल सकता है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त उत्पादन और वितरण व्यवस्था जरूरी होगी।
इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि इथेनॉल उत्पादन से किसानों को लाभ मिले और ईंधन नीति का फायदा आम लोगों तक पहुंचे। अदालत में चल रही सुनवाई से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि आवंटन संबंधी विवाद और राष्ट्रीय इथेनॉल मिश्रण नीति के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।








